
हरिद्वार। मां मनसा देवी प्राचीन सीढ़ी पैदल मार्ग को दोबारा खोले जाने और स्थानीय लघु व्यापारियों को स्वरोजगार के लिए व्यापार संचालन की अनुमति दिए जाने की मांग को लेकर गुरुवार को स्थानीय व्यापारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में मां मनसा देवी और मां चंडी देवी पैदल मार्ग से जुड़े व्यापारियों ने अपनी मांगों को दोहराते हुए राज्य सरकार से शीघ्र कार्रवाई की अपील की।
गंगा वाटिका में आयोजित बैठक में लघु व्यापार एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष संजय चोपड़ा ने कहा कि 27 जुलाई 2025 को मां मनसा देवी क्षेत्र में हुई दुर्घटना के बाद राजाजी नेशनल पार्क प्रशासन द्वारा प्राचीन सीढ़ी पैदल मार्ग बंद कर दिया गया था। घटना के लगभग 10 महीने बीत जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई, जो गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा और तीर्थ सीजन के दौरान मां मनसा देवी और चंडी देवी में दर्शन के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में तीर्थ यात्रियों की सुविधा और स्थानीय व्यापारियों के स्वरोजगार को ध्यान में रखते हुए मार्ग को खोला जाना और व्यापार संचालन की अनुमति देना न्यायसंगत होगा।
बैठक के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा वन मंत्री सुबोध उनियाल को ईमेल भेजकर मांग की गई कि उत्तराखंड के अन्य प्रमुख सिद्धपीठों एवं मंदिरों—जैसे नीलकंठ, पूर्णागिरि, बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री—की तर्ज पर मां मनसा देवी और चंडी देवी पैदल मार्ग के व्यापारियों के लिए ईको विकास समिति का गठन किया जाए।
संजय चोपड़ा ने कहा कि समिति गठन से एक ओर क्षेत्र की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित होगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय व्यापारियों की आजीविका भी सुचारू रूप से चल सकेगी। उन्होंने राजाजी नेशनल पार्क और वन विभाग के उच्च अधिकारियों से प्राथमिकता के आधार पर इस दिशा में निर्णय लेने की मांग की।
बैठक का संचालन जिला अध्यक्ष राजकुमार ने किया। इस दौरान कमल प्रताप चौहान, दयानंद, शशिकांत गोस्वामी, नीरज कुमार, लालचंद, विजय गोपाल, मोहनलाल, श्याम कुमार, वीरेंद्र, विनोद, मनीराम, चंदन रावत, जय सिंह बिष्ट, श्यामसुंदर राजपूत, राजेश कुमार और फूल सिंह सहित कई व्यापारी मौजूद रहे।
