
हरिद्वार / मंगलौर। आय प्रमाणपत्र बनाने की प्रक्रिया में एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया है, जहां वेतन स्लिप (सैलरी स्लिप) न होने के आधार पर एक किसान का आवेदन निरस्त कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद पीड़ित किसान को इधर-उधर भटकने को मजबूर होना पड़ रहा है।
मामला मंगलौर तहसील क्षेत्र के निजामपुर गांव का है। यहां निवासी किसान अनिल कुमार ने आय प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। नियमानुसार आवेदन की जांच संबंधित क्षेत्र के पटवारी को सौंपी गई। आरोप है कि पटवारी ने अपनी जांच रिपोर्ट में यह टिप्पणी दर्ज कर दी कि आवेदक के पास वेतन स्लिप उपलब्ध नहीं है। इसी आधार पर उच्चाधिकारियों ने किसान का आवेदन निरस्त कर दिया।
पीड़ित किसान का कहना है कि वह खेती-किसानी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता है और किसी सरकारी या निजी संस्था में कार्यरत नहीं है। ऐसे में उससे वेतन स्लिप की मांग करना पूरी तरह अनुचित है। किसान ने कहा कि “हम खेतों में मेहनत करके अनाज पैदा करते हैं, हमें कोई कंपनी या सरकार सैलरी स्लिप नहीं देती। ऐसे में हम वेतन स्लिप कहां से लाएं?”
आवेदन निरस्त होने से किसान के कई जरूरी कार्य अटक गए हैं और उसे तहसील के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि आय प्रमाणपत्र की जांच के दौरान ग्रामीण परिवेश और आवेदक के पेशे का ध्यान रखा जाना चाहिए। एक किसान या खेतिहर मजदूर से वेतन स्लिप मांगना न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि आम जनता को परेशान करने जैसा है।
वहीं, इस मामले पर तहसीलदार ने कहा कि यदि वेतन स्लिप न होने के कारण आवेदन निरस्त किया गया है और किसान द्वारा शिकायत की जाती है, तो मामले की जांच कराई जाएगी। साथ ही दोषी पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाएगी।
