
हरिद्वार। बुधवार को एसएमजेएन पीजी कॉलेज के सभागार में इको-फ्रेंडली होली एवं होली मिलन समारोह हर्षोल्लास और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कॉलेज के चेयरमैन श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी के पावन सानिध्य और आशीर्वाद में आयोजित इस कार्यक्रम ने पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक परंपराओं के समन्वय का संदेश दिया। समारोह में पत्रकारों, कॉलेज स्टाफ और गणमान्य लोगों ने फूलों के होली खेलकर साथ एक-दूसरे को होली की शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण के रूप में प्राचार्य डॉ. सुनील कुमार बत्रा ने इको-फ्रेंडली होली के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रंगों का यह पर्व जीवन में सकारात्मकता, प्रेम और सद्भाव का संचार करता है।
उन्होंने अपनी विशेष काव्य प्रस्तुति के माध्यम से होली के आध्यात्मिक और सामाजिक पहलुओं को जीवंत कर दिया। उनकी कविताओं ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया और सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उन्होंने युवाओं से रासायनिक रंगों से दूर रहकर प्राकृतिक रंगों के साथ सुरक्षित होली मनाने की अपील की।
इस अवसर पर चेयरमैन श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी ने कहा कि भारत की परंपराओं में होली का विशेष स्थान है और यह पर्व खुशियां बांटने व आपसी प्रेम बढ़ाने का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि त्योहार मनाते समय पर्यावरण का विशेष ध्यान रखना चाहिए और केमिकल युक्त रंगों के प्रयोग से बचना चाहिए।
उन्होंने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि समाज के सामने सत्य और निष्पक्ष खबरें रखना मीडिया का दायित्व है तथा राष्ट्र निर्माण में पत्रकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही कॉलेज में पत्रकारिता पाठ्यक्रम शुरू करने का प्रयास किया जाएगा, जिससे युवाओं को पत्रकारिता के क्षेत्र में बेहतर अवसर मिल सकें।
समारोह के दौरान वरिष्ठ पत्रकार डॉ. रजनीकांत शुक्ला ने होली पर्व से जुड़ी कथाएं और परंपराएं साझा कीं, जबकि संजय आर्य ने होली के सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला। जिला प्रेस क्लब के अध्यक्ष राकेश वालिया ने गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम में उत्साह का माहौल बना दिया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. रजनीकांत शुक्ला, राकेश वालिया, संजय आर्य, अमित शर्मा, सुमित यशकल्याण, लव शर्मा, रोहित वालिया, कोमल शर्मा, पूजा शर्मा सहित समस्त कॉलेज स्टाफ का विशेष सहयोग रहा।
समारोह के अंत में सभी उपस्थित अतिथियों ने सामूहिक रूप से स्वादिष्ट जलपान का आनंद लिया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि त्योहारों की खुशियां प्रकृति संरक्षण के साथ भी उत्साहपूर्वक मनाई जा सकती हैं।
