कुंभ मेला 2027 को लेकर संतो में आपसी विवाद को लेकर स्वामी आनंद स्वरूप ने कही बड़ी बात, देखें वीडियो

हरिद्वार में 2027 में होने जा रहे कुंभ मेले को लेकर साधु संतों में भी उत्साह देखने को मिल रहा है, शांभवी धाम के पीठाधीश्वर एवं काली सेना के प्रमुख, स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने कहा है कि कुंभ के आयोजन को लेकर संतो को आपस में विवाद नहीं करना चाहिए, 1950 से अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ही कुंभ मेले की व्यवस्था करता चला रहा है। कुंभ मेले में अखाड़ा परिषद का ही महत्व है किसी व्यक्ति विशेष का महत्व नहीं है, अखाड़ा परिषद का महत्व मिलना चाहिए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी अखाड़ों के साथ बैठक करके स्नान की तिथियां की घोषणा की है यह एक अच्छी परंपरा है इसका स्वागत होना चाहिए,

आनंद स्वरूप महाराज ने कहा कि कुंभ मेला विशेष आयोजन होता है खासतौर पर दो स्थान प्रयागराज और हरिद्वार में 6-6 साल में कुंभ देखने को मिलता है उन्होंने देश और विदेश के रहने वाले सनातन प्रेमियों से आवाहन किया है कि जिस तरह से अपने प्रयागराज के कुंभ मेले में शामिल होकर उसकी भव्यता और दिव्यता में भागीदारी की, इस तरह से आप हरिद्वार में होने जा रहे कुंभ मेले में भी पहुंचकर इस कुंभ मेले का लाभ उठाए, उन्होंने कहा कि मेले में संत रहेंगे, छावनी भी लगेगी, जिससे हरिद्वार कुंभ मेला 2027 बहुत ही दिव्य और भव्य होने जा रहा है कुंभ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं से उन्होंने आह्वान किया है कि समय रहते अपने टिकट व अन्य व्यवस्था कर ले, जिससे अंतिम समय में उन्हें किसी दिक्कत का सामना न करना पड़े।

स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने मेला प्रशासन और सरकार से आग्रह किया है कि जूना अखाड़ा सभी अखाड़ों में प्रमुख अखाड़ा है और उसकी छावनी ज्वालापुर में लगती है ज्वालापुर क्षेत्र को भी कुंभ मेले में शामिल किया जाए, उन्होंने कुंभ मेला क्षेत्र में तत्काल मांस मदिरा पर प्रतिबंध लगाते हुए इसे ड्राई जोन घोषित करने की मांग की है ।

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