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गुरुकुल कांगड़ी के अभियांत्रिकी संकाय में औषधीय पौधों का पौधरोपण कर मनाया गया हरेला पर्व


हरिद्वार। उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला के अवसर पर गुरुकुल कांगड़ी (सम विश्वविद्यालय) के अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय में पर्यावरण संरक्षण एवं हरित संस्कृति के संवर्धन के उद्देश्य से भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत संकाय परिसर में तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा, एलोवेरा, नीम सहित अनेक औषधीय एवं पर्यावरणीय महत्व के पौधों का रोपण किया गया। इन पौधों के माध्यम से विद्यार्थियों को औषधीय वनस्पतियों के महत्व से परिचित कराने तथा परिसर को हरित एवं प्रदूषणमुक्त बनाने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं संकायाध्यक्ष प्रो. मयंक अग्रवाल ने कहा कि हरेला पर्व प्रकृति, पर्यावरण और जीवन के बीच अटूट संबंध का प्रतीक है। यह पर्व हमें हर वर्ष अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनका संरक्षण करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में वृक्षों को देवतुल्य माना गया है और प्राचीन उक्ति “एक पेड़ दस पुत्र समान होता है” आज भी पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत सार्थक है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने जीवन में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन अभियांत्रिकी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. विपुल शर्मा ने कहा कि संकाय परिसर में पूर्व वर्षों में लगाए गए औषधीय पौधे आज विकसित होकर सभी को स्वच्छ वातावरण प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक हरियाली और जैव विविधता के लिए पूरे देश में विशिष्ट स्थान रखता है। उन्होंने चिपको आंदोलन की प्रेरणास्रोत वृक्ष मित्र गौरा देवी को स्मरण करते हुए कहा कि उनके पर्यावरण संरक्षण के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुँचाना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक वृक्षारोपण को सामाजिक दायित्व के रूप में अपनाए, तो पर्यावरण संबंधी अनेक समस्याओं का समाधान संभव है।
संकाय के उद्यान अधिकारी डॉ. धर्मेंद्र बालियान ने औषधीय पौधों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा, एलोवेरा और नीम जैसे पौधे मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। ये पौधे न केवल अनेक रोगों की रोकथाम और उपचार में उपयोगी हैं, बल्कि वायु को शुद्ध करने तथा जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण तभी सफल माना जाएगा जब पौधों की नियमित सिंचाई, देखभाल और संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।
कार्यक्रम में डॉ. एम. एम. तिवारी, डॉ. संजीव लाम्बा, डॉ. गजेंद्र सिंह रावत, डॉ. लोकेश जोशी, सहायक कुलसचिव डॉ. पंकज कौशिक सहित संकाय के शिक्षकगण, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण, जलवायु संतुलन और हरित उत्तराखंड के निर्माण का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण की शपथ लेते हुए यह संदेश दिया कि वृक्षारोपण केवल एक दिवस का कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए सतत चलने वाला जनआंदोलन है। हरेला पर्व के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, सामाजिक उत्तरदायित्व और पर्यावरणीय चेतना विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

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