एक पखवाड़े की देरी से पहुंचे प्रवासी पक्षी, जलवायु परिवर्तन के कारण प्रभावित हुआ प्रवासी पक्षियों का आगमन…

हरिद्वार। सर्दियों में उत्तराखंड के प्रवास पर आने वाले विदेशी पक्षी इस वर्ष तकरीबन एक पखवाड़े की देरी से पहुंचे हैं। इसका कारण जलवायु परिवर्तन माना जा रहा है। रूस, मध्य एशिया, स्कैंडिनेवियाई और यूरेशियाई देशों से हजारों किलोमीटर का सफर तय करके ये प्रवासी पक्षी प्रतिवर्ष नवम्बर-दिसम्बर माह में हरिद्वार में नीलधारा तट पर आते है। पक्षी वैज्ञानिकों के अनुसार पक्षियों में प्रवास एक प्राकृतिक पड़ाव होता है। खासकर बहुत ज्यादा ठंड वाले सर्दियों के महीनों में, लेकिन इस साल लंबे मानसून के मौसम, ग्लोबल वार्मिंग और नवम्बर-दिसम्बर में बारिश-बर्फबारी न होने के कारण प्रवासी पक्षी रूस, मंगोलिया, साइबेरिया की तरफ से उत्तराखंड में लगभग 15-18 दिन बाद आए हैं। विगत दिनों से प्रवासी पक्षी उत्तराखंड में देखे जा रहे हैं। जिससे बड़ी संख्या में पक्षी प्रेमी आकर्षित हो रहे हैं। सर्दियों के इस समय में स्कैंडिनेवियाई और यूरोपीय देशों के ज़्यादातर हिस्सों में कई दिनों तक भारी बर्फबारी होती है। इसलिए ये पक्षी कई देशों और हिमालय को पार करके उत्तरी भारत के निचले इलाकों, खासकर उत्तराखंड में नवम्बर के आखिर और दिसम्बर-जनवरी की शुरुआत में पहुंचते हैं। अंतर्राष्ट्रीय पक्षी वैज्ञानिक और गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव जीव विज्ञान विभाग के पूर्व डीन डॉ. दिनेश भट्ट ने बताया कि रूस, मध्य एशिया स्कैंडिनेवियाई यूरोपीय देशों में पक्षियों को बर्फबारी के कारण खाना मिलने में दिक्कत होती है और इसलिए वे हजारों किलोमीटर की यात्रा करके कम ठंडे इलाकों में पहुंचते हैं। जहां खाना और धूप भरपूर मात्रा में उपलब्ध होती है। वसंत ऋतु की शुरुआत में तापमान बढ़ने पर प्रवासी पक्षी फरवरी के आखिर और मार्च की शुरुआत में अपने मूल स्थान पर लौट जाएंगे। भारत में आने वाले ज्यादातर प्रवासी पक्षी यूरोप और मध्य एशिया से सेंट्रल फ्लाईवे मार्ग लेते हैं और उसी रास्ते से वापस भी लौटते हैं। हालांकि पिछले कुछ सालों में पक्षी वैज्ञानिकों ने देखा है कि साइबेरिया से क्रेन पक्षी उतराखंड में नहीं आ रहे है, जो चिंता का विषय है, क्योंकि पहले साइबेरियाई क्रेन पक्षियों के झुंड उत्तराखंड में गंगा नदी के किनारे काफी तादाद में आते थे। डा.दिनेश भट्ट इसका कारण ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाओं और जंगलों और गंगा घाटों में मानव बस्तियों या गतिविधियों के बढ़ने को मानते हैं। डा.दिनेश भट्ट ने कहा कि पक्षियों के संरक्षण की दिशा में कदम उठाने की ज़रूरत है। पिछले कुछ दशकों की तुलना में गढ़वाल क्षेत्र में आने वाले प्रवासी पक्षियों की संख्या में साफ़ गिरावट आई है, जो चिंता का विषय है। सरकार को इस संबंध में कदम उठाने चाहिए और पक्षी विशेषज्ञों से सुझाव लेने चाहिए। अन्यथा, तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन के कारण, राज हंस बार, हेडेड गूज जैसे ये प्रवासी पक्षी भी आने वाले सालों में विलुप्त हो सकते। भारत आने के लिए अपना पारंपरिक सर्दियों का रास्ता बदल सकते हैं इसकी भी संभावना है।
पक्षी विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि रूस-यूक्रेन संघर्ष ने भी साइबेरियाई क्षेत्र से प्रवासी पक्षियों की आवाजाही पर असर डाला है। पिछले 04 सालों से लगातार गोलाबारी और बमबारी के कारण रेडिएशन का स्तर बढ़ गया है, जिससे आबो हवा प्रवासी पक्षियों के लिए बहुत खतरनाक हो गई है। इसलिए पिछले कुछ सालों में रूस-यूक्रेन की तरफ से अपने मूल निवास स्थान से हरिद्वार तक लंबी उड़ान भरने वाले पक्षियों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही है। वर्तमान में चल रहे रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण हवा में गर्मी, धुआं और ज़हरीली धूल ने प्रवासी पक्षियों को बहुत ज्यादा प्रभावित किया है। जिसके लिए एक विस्तृत अध्ययन की जरूरत है। डॉ. भट्ट पिछले तीन दशकों से प्रवासी पक्षियों की आवाजाही का अध्ययन और निगरानी कर रहे हैं। मुख्य रूप से विदेशी पक्षी हरिद्वार (नीलधारा-झिलमिल झील), देहरादून (आसन बैराज/डाकपत्थर), पशु लोक बैराज ऋषिकेश, पौड़ी गढ़वाल (लैंसडाउन-सनेह कोटद्वार-कोलहू नदी का किनारा-राजाजी टाइगर रिजर्व, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व, बद्रीनाथ मंदिर-शेष नेत्र झील-माणा पास और अन्य ऊंचे इलाकों में आते हैं। इनमें रूडी शेल्डक, ब्लैक स्टॉर्क, ग्रेट कॉर्माेरेंट, लिटिल कॉर्माेरेंट, चेस्टनट-हेडेड टेसिया, वॉलक्रीपर, यूरेशियन विजन, पोचार्ड, स्पॉटेड फोर्कटेल, बार-हेडेड गूज, स्नोई-ब्रोड फ्लाईकैचर, हिमालयन रूबीथ्रोट, ब्राउन फिश उल्लू, ब्राउन डिपर, ग्रेट हॉर्नबिल, ओरिएंटल पाइड हॉर्नबिल, पैलास ईगल, बार विंग्ड फ्लाईकैचर-श्राइक, टील, पिंटेल, मल्लार्ड, और अन्य शामिल हैं। पक्षी प्रेमी संदीप रावत ने बताया कि प्रवासी पक्षियों को इस महीने के आखिर में पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार/लैंसडाउन में दो दिवसीय सनेह पक्षी महोत्सव में भी देख सकते हैं, जो 31 जनवरी से 01 फरवरी तक चलेगा।

