काली सेना ने किया भव्य शरदोत्सव कार्यक्रम

हरिद्वार। रविवार को शिव मंदिर के प्रांगण में (शिवालिक नगर ) काली सेना के बैनर तले भव्य शरदोत्सव कार्यक्रम संपन्न हुआ ।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि
काली सेना के संस्थापक
शांभवी पीठाधीश्वर परम पूज्य स्वामी आनंद स्वरूप जी महाराज जी रहे । विशाल समूह को संबोधित करते हुवे स्वामी आनंद स्वरूप जी महाराज ने कहा कि कुंभ क्षेत्र पर मनमानी नहीं चलने दी जाएगी ज्वालापुर और रुड़की को भी कुंभ क्षेत्र में सम्मिलित करे सरकार , कुंभ में किन्नरों पर लगेगा पूर्ण प्रतिबंध । आगे स्वामी जी ने कहा कि उत्तराखंड की डेनोग्राफी परिवर्तन चिंता का विषय है इसे रोकने के लिए सरकार तत्काल उत्तराखंड को देवभूमि घोषित कर ग़ैर हिंदुओं के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाएं ।
कार्यक्रम का संचालन शिव मंदिर समिति के महासचिव श्री शशि भूषण पांडे जी ने किया ।

काली सेना की स्थापना अब तक का सफर और आगे की रणनीति पर डॉ पंकज सिंह जी ने अपने विचार रखें ।
पूज्य स्वामी आनंद स्वरूप जी के आगमन पर सबसे पहले शांभवी गुरुकुलम के छात्रों ने स्वस्तिवाचन गाकर उनका स्वागत किया ।
स्वागत करने वाले विद्यार्थियों में श्री ओम पांडे ,अतुल गिरी , श्रेयश पांडे ,आर्यन गिरी, सौरभ गिरी, सौरभ पांडे ,रुद्र भट्ट ,केशव भारद्वाज एवं प्रेम शर्मा रहे ।


श्री राजशेखर जोशी (उपाध्यक्ष)
सेतु आयोग जी ने महाराज श्री के चरणों को किया,
तो महाराज श्री ने अंग वस्त्र ओढ़ाकर उनको अपना आशीर्वाद प्रदान किया।

इस कार्यक्रम में एक तरफ जहां श्रद्धालुओं ने स्वामी आनंद स्वरूप जी का जोरदार ढंग से स्वागत वंदन अभिनंदन किया ।

वही दुसरी तरफ पूज्य स्वामी आनंद स्वरूप जी महाराज जी ने भी मंच पर बुलाकर एक-एक करके सभी श्रद्धालुओं को अंग वस्त्र पहनाकर अपना आशीर्वाद प्रदान किया।

शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप जी का स्वागत करने वालों में
श्री विमलेश मिश्रा जी, श्री मनोज शुक्ला जी, पूर्व पार्षद श्री निशिकांत शुक्ला जी, श्री गौरव शर्मा जी,
श्री मनोज गहतोड़ी, राम भरत कुशवाहा जी, बालकृष्ण शास्त्री जी, पंडित अधीर कौशिक जी, श्री सुशील त्रिपाठी जी, डॉ संजय त्रिपाठी जी ,डॉक्टर सुरेश चौबे जी ,श्री अमित नायक जी, श्री प्रमोद रस्तोगी जी, श्री प्रवीण रस्तोगी जी ,श्री पंकज गुप्ता जी ,श्री धीरेंद्र प्रधान जी, श्री अजय मौर्या जी ,श्री आशीष दीक्षित जी ,श्री अनुज पांडे जी, आदि अनेक लोगों ने स्वागत किया।
कार्यक्रम के अंत में प्रसाद के रूप में
सभी श्रद्धालुओं ने भोजन ग्रहण किया ।

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