
हरिद्वार। नगर आयुक्त आईएएस नंदन कुमार के निर्देशों के क्रम में नगर निगम हरिद्वार ने कांवड़ मेला-2025 में सफलतापूर्वक अपनाई गई ड्रोन आधारित निगरानी व्यवस्था को इस वर्ष कांवड़ मेला-2026 में और अधिक उन्नत एवं प्रभावी स्वरूप दिया है। करोड़ों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण पूरे कांवड़ मार्ग पर प्रत्येक स्थान की लगातार मानवीय निगरानी करना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है। ऐसे में नगर निगम ने आसमान से रियल-टाइम निगरानी को अपना सबसे प्रभावी हथियार बनाया है।
अब ड्रोन पूरे कांवड़ मार्ग पर लगातार उड़ान भरकर उन स्थानों की पहचान कर रहे हैं जहाँ सामान्य निरीक्षण दलों की नजर तुरंत नहीं पहुँच पाती। यदि कहीं भी झाड़ियों, डिवाइडरों, बैरिकेडिंग के पीछे अथवा भीड़ के बीच छिपा हुआ कूड़ा दिखाई देता है, तो ड्रोन टीम तत्काल उस स्थान का फोटोग्राफ एवं जियोटैग लोकेशन नगर निगम के विशेष व्हाट्सएप कमांड ग्रुप पर साझा करती है।
इस कमांड ग्रुप में सभी संबंधित सफाई निरीक्षक, जोन प्रभारी एवं ड्रोन टीम के सदस्य जुड़े हुए हैं। फोटो अपलोड होते ही संबंधित सफाई निरीक्षक को टैग किया जाता है और तत्काल सफाई दल मौके पर भेजा जाता है। सफाई कार्य पूर्ण होने के बाद उसी स्थान की “आफ्टर क्लीनिंग” फोटो पुनः ग्रुप में साझा की जाती है, जिससे कंट्रोल रूम यह सुनिश्चित करता है कि शिकायत का वास्तविक एवं संतोषजनक निस्तारण हो चुका है। इससे पूरी व्यवस्था रियल-टाइम, पारदर्शी एवं जवाबदेह बन गई है।
ड्रोन तकनीक का उपयोग केवल गंदगी की पहचान तक सीमित नहीं है। यदि कांवड़ मार्ग पर कहीं भी कोई पशु विचरण करता हुआ दिखाई देता है, तो ड्रोन टीम तत्काल उसकी सटीक लोकेशन साझा करती है। सूचना मिलते ही नगर निगम की संबंधित टीम मौके पर पहुँचकर आवश्यक कार्रवाई करती है, जिससे श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं निर्बाध आवागमन सुनिश्चित हो सके।
इसके अतिरिक्त ड्रोन के माध्यम से भीड़ के घनत्व के अनुसार अतिरिक्त सफाई दलों की तैनाती, डस्टबिन की स्थिति की निगरानी, संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण, सड़क किनारे जमा अपशिष्ट की पहचान तथा ऐसे स्थानों का सर्वेक्षण भी किया जा रहा है जहाँ सामान्य निरीक्षण करना कठिन होता है। इससे कंट्रोल रूम को पूरे कांवड़ मार्ग का बर्ड्स-आई व्यू (Bird’s Eye View) प्राप्त होता है और संसाधनों का त्वरित एवं सटीक प्रबंधन संभव हो रहा है।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार कांवड़ मेला-2025 के अनुभवों को आधार बनाकर वर्ष 2026 में इस प्रणाली को और अधिक स्मार्ट बनाया गया है। अब प्रत्येक शिकायत के साथ उसका फोटो, जियोटैग, जिम्मेदार अधिकारी तथा निस्तारण का प्रमाण एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहता है। इससे समस्या की पहचान से लेकर उसके समाधान तक का समय पहले की तुलना में काफी कम हो गया है।
नगर आयुक्त आईएएस नंदन कुमार ने कहा कि नगर निगम हरिद्वार का उद्देश्य केवल सफाई करना नहीं, बल्कि तकनीक के माध्यम से स्वच्छता प्रबंधन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाना है। कांवड़ मेला-2026 में ड्रोन आधारित रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से पूरे कांवड़ मार्ग पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसी भी स्थान पर गंदगी, अपशिष्ट, पशु विचरण अथवा अन्य व्यवस्था संबंधी समस्या की तत्काल पहचान कर उसका त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा सके। प्रत्येक सूचना का फोटो, जियोटैग, संबंधित अधिकारी का विवरण तथा निस्तारण का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा रहा है, जिससे कार्यों की सतत मॉनिटरिंग एवं जवाबदेही सुनिश्चित हो रही है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग से नगर निगम करोड़ों शिवभक्तों को स्वच्छ, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है और कांवड़ मेला-2026 को तकनीक आधारित उत्कृष्ट प्रबंधन का एक आदर्श मॉडल बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।
तकनीक, त्वरित निर्णय और जवाबदेही का यह मॉडल कांवड़ मेला-2026 में नगर निगम हरिद्वार की सबसे अभिनव पहलों में से एक बनकर उभर रहा है, जहाँ “आसमान से निगरानी और जमीन पर तत्काल कार्रवाई” स्वच्छ, सुरक्षित और सुव्यवस्थित कांवड़ यात्रा का नया मानक बन रही है।










