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झिलमिल झील संरक्षण रिजर्व की जंगल सफारी ने बनाया नया रिकॉर्ड…

हरिद्वार। उत्तराखंड में राजाजी टाइगर रिजर्व और जिम कॉर्बेट पार्क की तर्ज पर हरिद्वार वन विभाग द्वारा संचालित झिलमिल झील संरक्षण रिजर्व भी जंगल सफारी के लिए पर्यटकों की पसंद बनता जा रहा है। इस सीजन में यहां देश विदेश से आने वाले पर्यटकों ने हाथी, गुलदार, भालू, चीतल, हिरन और सांभर जैसे सैकड़ों वन्यजीवों का दीदार किया। इस संरक्षित जंगल में आने वाले पर्यटकों की संख्या ने अपने पिछले सारे रिकार्ड तोड़ दिए। पिछले साल 10840 पर्यटक यहां जंगल सफारी करने पहुंचे थे और वन विभाग को 31,19,525 का राजस्व प्राप्त हुआ था। इस बार 16,717 पर्यटकों ने जंगल सफारी और राजस्व बढ़कर 53,01,200 रूपये तक पहुंच गए। मानसून सीजन के चलते झिलमिल झील के गेट बंद कर किए गए हैं और अब अक्टूबर में फिर से यहां जंगल सफारी के लिए गेट खोले जाएंगे।
हरिद्वार वन प्रभाग के अंतर्गत स्थित झिलमिल झील संरक्षण रिजर्व, जिसे वर्ष 2005 में भारत के पहले संरक्षण रिजर्व के रूप में अधिसूचित किया गया था। आज उत्तराखण्ड में प्रकृति एवं वन्यजीव पर्यटन का एक प्रमुख केन्द्र बनकर उभरा है। अपनी अद्वितीय जैव-विविधता, प्राकृतिक सौन्दर्य तथा सुव्यवस्थित सफारी संचालन के कारण यह स्थल देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को निरन्तर आकर्षित कर रहा है।
विगत पाँच वर्षों में झिलमिल झील संरक्षण रिजर्व की सफारी के प्रति पर्यटकों का आकर्षण लगातार बढ़ा है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में 4,058 पर्यटकों ने सफारी का लाभ उठाया, जिससे ₹9,33,500 का राजस्व प्राप्त हुआ। वर्ष 2022-23 में 4,880 पर्यटक आए तथा ₹11,65,943 का राजस्व प्राप्त हुआ। वर्ष 2023-24 में 6,369 पर्यटकों से ₹17,74,023 की आय हुई। वर्ष 2024-25 में 10,840 पर्यटक सफारी पर आए, जिससे ₹31,19,525 का राजस्व प्राप्त हुआ। वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 16,717 पर्यटकों ने सफारी का आनंद लिया तथा ₹53,01,200 का राजस्व अर्जित हुआ। इस प्रकार पाँच वर्षों में कुल 42,864 पर्यटकों ने सफारी का भ्रमण किया तथा लगभग ₹1.23 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ। यह निरंतर वृद्धि झिलमिल झील संरक्षण रिजर्व की बढ़ती लोकप्रियता तथा वन विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जा रही उच्च गुणवत्ता की पर्यटन एवं संरक्षण सेवाओं का प्रमाण है।
झिलमिल झील संरक्षण रिजर्व की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ एक ही परिदृश्य में सघन वन, विशाल घास के मैदान, नदी तट तथा आर्द्रभूमि जैसे चार भिन्न-भिन्न प्राकृतिक आवास विद्यमान हैं। इसके अलावा यहां सफारी के दौरान पर्यटकों को हाथी, तेंदुआ, भालू, मगरमच्छ, चीतल, सांभर सहित अनेक वन्यजीवों के दर्शन नियमित रूप से होते हैं तथा कई अवसरों पर बाघ का भी दीदार पर्यटकों के लिए अविस्मरणीय अनुभव बन जाता है। इसके अतिरिक्त यहाँ पक्षियों की 200 प्रजातियों एवं अन्य वन्यजीवों की विविधता प्रकृति प्रेमियों, वन्यजीव फोटोग्राफरों एवं शोधकर्ताओं के लिए भी विशेष आकर्षण का केन्द्र है। हरिद्वार वन प्रभाग द्वारा संचालित सफारी के माध्यम से पर्यटकों को केवल भ्रमण ही नहीं कराया जाता, बल्कि उन्हें वनों, वन्यजीवों, जैव-विविधता संरक्षण तथा पर्यावरण संरक्षण के महत्व के प्रति भी जागरूक किया जाता है। प्रशिक्षित सफारी दल पर्यटकों को संरक्षण रिजर्व की पारिस्थितिकी, वन्यजीवों के व्यवहार तथा संरक्षण प्रयासों की विस्तृत जानकारी प्रदान करता है, जिससे यह सफारी एक शैक्षिक एवं जागरूकता आधारित अनुभव भी बन जाती है।
हरिद्वार के डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि कहा कि झिलमिल झील संरक्षण रिजर्व केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा एवं सतत् पर्यटन का उत्कृष्ट उदाहरण है। यहाँ आने वाले पर्यटक प्राकृतिक वनों, घास के मैदानों, नदी तटों एवं आर्द्रभूमियों की अनूठी पारिस्थितिकी का अनुभव करते हुए वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक परिवेश में देखने का अवसर प्राप्त करते हैं। सफारी के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। हमारा प्रयास है कि संरक्षण एवं पर्यटन के मध्य संतुलन स्थापित करते हुए झिलमिल झील संरक्षण रिजर्व को देश के प्रमुख इको-टूरिज्म स्थलों में विकसित किया जाए। इस बार भी मानसून सीजन के कारण जंगल सफारी बंद कर दी गई है। मानसून सीजन वन्यजीवों का प्रजनन काल होता है। मानसून के बाद सफारी ट्रैक की मरम्मत कराई जाएगी और अक्टूबर माह में फिर से जंगल सफारी शुरू की जाएगी।

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