
हरिद्वार। कुंभ 2027 से पहले धर्मनगरी हरिद्वार में साधु-संतों की गतिविधियां तेज होने लगी हैं। विभिन्न अखाड़ों की ओर से कुंभ की तैयारियों को लेकर धार्मिक और संगठनात्मक गतिविधियों को गति दी जा रही है। इसी क्रम में अलख अखाड़े ने भी हरिद्वार कुंभ को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। अखाड़े की ओर से 108 महामंडलेश्वरों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
इसी कड़ी में जम्मू-कश्मीर के संत दीपेंद्र नाथ को महामंडलेश्वर की उपाधि प्रदान की गई। संतों की मौजूदगी में पूरे धार्मिक विधि-विधान और परंपराओं के साथ उनकी चादर विधि संपन्न कराई गई। इस दौरान संत समाज के कई पदाधिकारी और अनुयायी मौजूद रहे।
नवनियुक्त महामंडलेश्वर दीपेंद्र नाथ ने कहा कि अखाड़े के साथ जुड़कर वह गौ-रक्षा और लव जिहाद के खिलाफ जागरूकता के विषयों पर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि हरिद्वार कुंभ देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं और संतों के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है और वह इसमें अखाड़े की विचारधारा एवं सामाजिक सरोकारों के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।
अखाड़े की महामंडलेश्वर हर्षिता गिरी ने बताया कि सामाजिक सरोकारों और सनातनी परंपराओं को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से अखाड़े की ओर से आज चार महामंडलेश्वरों की ताजपोशी की गई है। उन्होंने कहा कि कुंभ 2027 को देखते हुए अखाड़े की ओर से संगठन को विस्तार देने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि हरिद्वार कुंभ से पहले अलख अखाड़े की ओर से कुल 108 नए महामंडलेश्वर बनाए जाने हैं। इसके लिए संतों के चयन और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जल्द ही बाकी महामंडलेश्वरों की भी ताजपोशी की जाएगी।
अलख अखाड़े की ओर से महामंडलेश्वरों की नियुक्ति को कुंभ से पहले संगठन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में अखाड़े की ओर से कुंभ को लेकर धार्मिक आयोजनों और अन्य गतिविधियों को और विस्तार दिए जाने की संभावना है।









