
हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी सम विश्वविद्यालय के अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय के कम्प्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग में पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक तकनीक के समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण शोध कार्य किया गया है। विभाग के प्रोफेसर डॉ. मयंक अग्रवाल के निर्देशन में शोधार्थी अंजलि अरोड़ा ने नदी स्वच्छता अभियान में जनसहभागिता एवं वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ब्लॉकचेन आधारित सॉफ्टवेयर प्रणाली पर शोध किया है।
प्रो. मयंक अग्रवाल ने बताया कि यह शोध विश्व के विभिन्न देशों में नदी प्रदूषण की गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए किया गया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि नाइजीरिया की डेल्टा नदी में तेल रिसाव (ऑयल स्पिल) के कारण नदी का जल अत्यधिक प्रदूषित हो गया था। नदी की सफाई के लिए बड़े पैमाने पर धनराशि और जनसहयोग की आवश्यकता थी, लेकिन पारदर्शिता की कमी तथा लोगों के विश्वास में कमी के कारण अपेक्षित सहयोग नहीं मिल सका।
इसी चुनौती के समाधान के लिए ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित एक ऐसी प्रणाली विकसित की गई, जिसमें नदी सफाई से संबंधित प्रत्येक वित्तीय लेन-देन, दान, व्यय और कार्य की प्रगति सुरक्षित एवं पारदर्शी रूप से दर्ज की जा सकती है। ब्लॉकचेन तकनीक के कारण किसी भी प्रकार की जानकारी में छेड़छाड़ की संभावना अत्यंत कम हो जाती है, जिससे आम नागरिक, स्वयंसेवी संस्थाएँ और सरकारी एजेंसियाँ पूरे अभियान की वास्तविक स्थिति को आसानी से देख सकती हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में गंगा सहित अन्य नदियों की स्वच्छता के लिए भी इस प्रकार की तकनीक अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकती है। यदि नदी संरक्षण अभियानों में ब्लॉकचेन आधारित पारदर्शी व्यवस्था अपनाई जाए तो लोगों का विश्वास बढ़ेगा, अधिक से अधिक आर्थिक सहयोग प्राप्त होगा तथा जनभागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
शोधार्थी अंजलि अरोड़ा ने अपने शोध में यह भी दर्शाया है कि आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी और ब्लॉकचेन जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग केवल वित्तीय क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन और सामाजिक विकास के कार्यों में भी प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। यह शोध भविष्य में नदी संरक्षण एवं स्वच्छता अभियानों के लिए एक नवीन और व्यवहारिक तकनीकी मॉडल के रूप में उपयोगी सिद्ध हो सकता है।
