रुड़की ऊर्जा निगम द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में की जा रही कथित तानाशाही, बिजली चोरी के नाम पर दर्ज मुकदमों और अनाप-शनाप बिलों के विरोध में आज सुराज सेवा दल के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोल दिया। सुराज सेवा दल के सैंकड़ो कार्यकर्ताओं ने ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता (अर्बन) के कार्यालय पर इकट्ठा होकर ऊर्जा निगम प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की।
सुराज सेवा दल के प्रदेश अध्यक्ष रमेश जोशी ने बड़ी बेबाकी से आम जनता और ग्रामीणों की समस्याओं को अधिशासी अभियंता के सामने रखा। उन्होंने कहा की “ऊर्जा निगम इस समय पूरी तरह तानाशाही रवैया अपनाए हुए है। आए दिन चेकिंग के नाम पर निर्दोष ग्रामीणों को बिजली चोरी में फंसाकर परेशान किया जा रहा है। उन पर भारी-भरकम जुर्माने लगाकर आम आदमी का मानसिक और आर्थिक शोषण हो रहा है। सुराज सेवा दल आम जनता के साथ इस तरह का अन्याय किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगा।उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली विभाग के अधिकारी अपनी कार्यशैली सुधारने के बजाय लापरवाह बने हुए हैं, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर ग्रामीणों और आम उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है।
प्रदेश अध्यक्ष रमेश जोशी ने ऊर्जा निगम प्रशासन को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि विभाग ने जल्द ही अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं किया और ग्रामीणों का उत्पीड़न बंद नहीं किया, तो सुराज सेवा दल उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन सड़कों पर उतरकर ऊर्जा निगम की ईंट से ईंट बजा देगा।
वहीं दूसरी ओर, प्रदर्शन और आरोपों के बाबत ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता अनिल कुमार मिश्रा से बात की गई तो उन्होंने विभाग का पक्ष रखते हुए कहा की ऊर्जा निगम किसी भी आम नागरिक या उपभोक्ता का शोषण नहीं कर रहा है।विभाग द्वारा क्षेत्र में केवल अवैध रूप से बिजली चोरी करने वालों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है।
चेकिंग अभियान के दौरान जिन स्थानों पर बिजली चोरी पकड़ी गई है, केवल उन्हीं मामलों में नियमानुसार कार्रवाई और जुर्माना लगाया गया है।

प्रदर्शन में सुराज सेवा दल के सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे जिनमें नौशाद प्रधान, इंतज़ार प्रधान, हाजी इसरार,साबिर राणा, रईस कलियर, खलील प्रधान नगला इमरती, नितिन कटारिया, सतवीर, दिनेश,अजय प्रधान, गौरव, राशिद सभासद, इकराम, मुन्तज़ीर, आदिल, तस्लीम जब्बार, मेहरबान, अब्दुल कादिर आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
