महिषासुर राक्षस का वध करने पर मां दुर्गा महिषासुरमर्दिनी कहलायी -पंडित पवन कृष्ण शास्त्री।

हरिद्वार। श्री अखंड परशुराम अखाड़े द्वारा श्री बिल्वकेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित श्रीमद् देवी भागवत कथा के चतुर्थ दिवस कथा व्यास भागवताचार्य पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने महिषासुर मर्दिनी का चरित्र श्रवण कराते हुए बताया कि महिषासुर राक्षस का वध करने पर मां दुर्गा महिषासुर मर्दिनी कहलायी। महिषासुर एक बहुत ही मायावी दानव था। वह ब्रह्मऋषि कश्यप और दनु का पोता और रम्भ नामक दैत्य द्वारा महिषी के गर्भ से उत्पन हुआ था। महिषासुर ने ब्रह्मा की कठोर तपस्या करके वरदान प्राप्त किया कि इस ब्रहमांड में और पृथ्वी पर उसे कोई देवता, मनुष्य या दानव मार ना सके। उसकी मृत्यु हो तो किसी स्त्री के हाथों हो। ब्रह्मा से वरदान प्राप्त कर महिषासुर स्वर्ग लोक में देवताओं को परेशान करने लगा और पृथ्वी पर भी उत्पात मचाने लगा। उसने स्वर्ग पर आक्रमण कर और इंद्र को परास्त कर स्वर्ग पर कब्ज़ा कर लिया और सभी देवताओं को वहां से खदेड़ दिया। परेशान होकर देवता ब्रम्हा, विष्णु और महेश के पास सहायता के लिए पहुंचे। सारे देवताओं ने मिलकर उसे फिर से परास्त करने के लिए युद्ध किया लेकिन हार गये। कोई उपाय न मिलने पर देवताओं ने उसके विनाश के लिए अपने अपने तेज से एक देवी को उत्पन्न किया। जिन्हें हम मां दुर्गा के नाम से जानते हैं। देवी दुर्गा ने महिषासुर से नौ दिनों तक युद्ध किया और दसवें दिन उसका वध किया। इसी उपलक्ष्य में नौ दिन तक नवरात्रि और दसवें दिन विजयादशमी मनायी जाती है। महिषासुर का वध करने पर मां भगवती महिषासुरमर्दिनी कहलायी। श्री अखंड परशुराम अखाड़े राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि आज भी राक्षसी प्रवर्ती के लोग समाज में घूम रहे हैं। जिनके द्वारा सनातन को मिटाने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे लोगों से सनातनियों को बचानेएवं सनातन का परचम लहराने के लिए श्री अखंड परशुराम अखाड़ा सभी सनातनियों को एकजुट करने का कार्य कर रहा है। इस अवसर पर बिल्वकेश्वर महादेव मंदिर के व्यवस्थापक सतीश वन महाराज, लाहू वन महाराज, विवेक मिश्रा, इंदु मिश्रा, भारत शर्मा, भावना शर्मा, बृजमोहन शर्मा, यशपाल शर्मा, निलेश गौतम, दिनेश बाली, आशीष शर्मा, वैद्य एम.आर शर्मा, संजय शर्मा, रोहित शर्मा, सुमित चावला, जलज कौशिक, सोनिया कौशिक, मनोज ठाकुर, कुलदीप शर्मा, महंत रविपुरी, डॉ.विशाल गर्ग, रोहित शर्मा, नितिन शर्मा, पंडित संजय कृष्ण शास्त्री, कृष्णा शास्त्री, आचार्य ओम नारायण, हेमंत कला, आचार्य विष्णु शास्त्री, मयंक भारद्वाज, आशीष शर्मा, अचिन कुमार, मोहित कुमार, सचिन तिवारी, साध्वी अनन्या देवी आदि भक्त मौजूद रहे।