स्पाट लाईट एवार्ड 2024 से सम्मानित हरिद्वार की ओजस्वी कवियित्रीश्रीमती अनुराधा गोयलजी की” यादो की डोरियाँ” कविताओं का संग्रह का विमोचन होटल फ्लोरा शिवालिक नगर में आर्ट ऑफ लिविंग के हरिद्वार चैप्टर के हेड टीचर व बॉडी माइंड हीलिंग सेंटर के अध्यक्ष श्री तेजिंदर सिंह जी द्वारा किया गया । इस मौके पर हरिद्वार के कई गणमान्य अतिथि तथा देहरादून से पदम श्री डॉक्टर योगी एरोन भी उपस्थित थे वही पेस्टल वीड स्कूल देहरादून की आर्ट की एच ओ डी श्रीमती समता गोयल भी परिवार सहित उपरोक्त पुस्तक विमोचन में उपस्थित थी इस मौके पर श्रीमती अनुराधा गोयल ने अपनी मनपसंद कविता “अपने फरिश्ते को समर्पित” की कुछ पंक्तियों को गुनगुनाया जिसके बोल इस तरह हैं “भोली सी अनजान दुनिया से बेखबर
दुनिया में क्यों आई
क्या कुछ रुका हुआ था मेरे लिए कौन जवाब देता
वह तो पर्दे में छुपा हुआ था
बचपन बीता आई जवानी
एक फरिश्ता भी साथ ले आई “
इस मौके पर रोशनाबाद कोर्ट हरिद्वार के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री पंकज गोयल भी उपस्थित थे जो अनुराधा जी के होनहार सुपुत्र हैं और लिखने का शौक है ,उनकी भी कुछ कविताएं श्रीमती अनुराधा गोयल ने इस पुस्तक में सम्मिलित की है ।
पंकज जी की एक कविता” क्या बांटना चाहता इंसान “आज की परिस्थितियों को देखते हुए बिल्कुल सटीक है जिसमें हम नेचर से खिलवाड़ कर पेड़ो को काटते चले जा रहे हैं और कंक्रीट का जाल बिछाते चले जा रहे हैं उस विषय पर उन्होंने अपनी कविता के माध्यम से कटाक्ष किया है । उनकी पत्नी सिम्मी व बेटी शुभांगी भी उपस्थित रही और उनके लेखन को आगे बढ़ाने में बहुत योगदान दिया और सहयोग किया । साथ मे श्रीमति जसबीर कौर, श्वेता , रिया, आन्या, सौरभ आदि व
परिवार के अन्य सदस्य के साथ श्रीमती अनुराधा गोयल के बड़े बेटे अखिल गोयल भी इस मौके पर वहां पर परिवार समेत उपस्थित थे । उनका कहना था कि मेरी माता जी जो बचपन मे ही दिव्यांग होने के बावजूद बहुत ही जुझारू और कर्मठ रही और हमेशा कुछ ना कुछ करती रहती थी यह भी इनका एक रूप है जो कि आप आज देख रहे हैं कवित्री के रूप में । उन्होंने कहा कि अस्सी वर्ष की आयु में उन्होंने जीवन को एक साधना की तरह जिया है, हमे अपनी माँ पर गर्व है ।
श्री तेजेन्द्र सर जिससे प्रेरणा लेकर अनुराधा जी ने अपनी कविताओ के संग्रह को आगे बढ़ाया और हौसला दिया और जिनकी अताह मेहनत के कारण संग्रह आपके पास है उनको दिल से धन्यवाद देता हूं ।
