उधर उपलब्धियों का बड़ा जश्न, इस तरफ सन्नाटा,बीजेपी सरकार के 4 साल,जानिये

सुमित यशकल्याण


उत्तराखंड को मुंह चिढ़ा रही उत्तर प्रदेश में सरकार के 4 साल के कार्यक्रमों की चमक दमक


ब्यूरो
उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश दोनों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बने चार साल हो चुके हैं लेकिन 4 साल के बाद तस्वीर बिल्कुल बदली हुई है । एक तरफ उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार अपने 4 साल पूरे होने का जश्न पूरे जोर-शोर से मना रही है । हर जिले में भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है । सरकार जनता के द्वार जाकर अपनी उपलब्धियां बता रही है और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता तथा प्रशासनिक अधिकारी मुख्यमंत्री सहित पूरी सरकार की शान में कसीदे गढ रहे हैं। पूरे उत्तर प्रदेश में जश्न जैसा माहौल है। क्योंकि सरकार के 4 साल पूरे हो चुके हैं। बॉर्डर के इस तरफ उत्तराखंड है लेकिन तस्वीर बिल्कुल उल्टी है, सन्नाटा पसरा है यहां की सरकार के भी 4 साल पूरे हो चुके हैं लेकिन हर कोई इन 4 सालों की चर्चा करने से भी बच रहा है ।

वजह है कि जो सरकार तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में चल रही थी उसे जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं पाते हुए खुद भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने न केवल खारिज किया बल्कि मुख्यमंत्री ही बदल डाला। पिछले 2 महीने से तत्कालीन मुख्यमंत्री अपने सरकार की उपलब्धियों को रिकॉर्ड तथा कार्य की नई संस्कृति बताते हुए बातें कम काम ज्यादा का स्लोगन देकर पूरे राज्य में 4 साल का जश्न मनाने की तैयारी में जुटे थे, सभी विधायकों को अपने अपने क्षेत्र में बड़े आयोजन करने के लिए बजट भी आवंटित कर दिया गया था लेकिन इससे पहले ही सरकार का तख्तापलट हो गया और मुख्यमंत्री के रूप में त्रिवेंद्र सिंह रावत की जगह तीरथ सिंह रावत आ गए। फल स्वरूप तस्वीर बदली और सन्नाटा पसर गया। सवाल यह उठता है कि सरकार तो भारतीय भारतीय जनता पार्टी की ही चुनी गई थी मुख्यमंत्री तो बाद में चुना गया था। क्या नए मुख्यमंत्री अपनी पार्टी की सरकार के 4 साल के कार्यकाल में ऐसा कोई भी काम नहीं मानते जिसे उपलब्धि के रूप में जनता को बताया जा सके। अधिकारियों के माध्यम से भी कोई उपलब्धि बताने की जरूरत नहीं महसूस की गई और सबसे बड़ी बात यह है कि भारतीय जनता पार्टी का जो संगठन 4 सालों तक त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार को उत्तराखंड के 20 साल के शासन में सबसे सफल, जीरो टोलरेंस वाली सरकार और जनता के हित में सबसे ज्यादा कल्याणकारी योजनाएं बनाने वाली सरकार होने का दावा कर रही थी तथा 4 साल के जश्न की तैयारियां की जा रही थी उन्होंने भी मुखिया बदलते ही अपने हाथ खींच लिए, अब 4 साल की सरकार के कहीं चर्चा तक नहीं हो रही है ।

ऐसे में उत्तर प्रदेश में हो रहे कार्यक्रम उत्तराखंड के भाजपाइयों को यहां की जनता को और प्रशासन को मुंह चिढ़ा रहे हैं। ऐसा लग ही नहीं रहा है कि 4 साल पहले उत्तराखंड में भी भाजपा की सरकार बनी थी।

कांग्रेस के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता मनीष कर्णवाल का कहना है कि यह बदली हुई तस्वीर ही यह साबित करती है कि भारतीय जनता पार्टी ने उत्तराखंड के 4 साल बर्बाद कर दिए। जिस राज्य को कांग्रेस ने विकास के पथ पर छोड़ा था वह आज विकास से बहुत दूर चला गया है दरअसल भाजपाइयों पर बताने के लिए था ही कुछ नहीं, इसलिए अपनी फजीहत बचाने के लिए मुख्यमंत्री बदलकर पार्टी हाईकमान ने जनता की नजरों में अपने नंबर बढ़ाने का प्रयास किया है लेकिन इससे कोई लाभ मिलने वाला नहीं है।

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