हरिद्वार। आज के दौर में जहां रिश्तों में दरार और महिलाओं के खिलाफ अपराधों की खबरें अक्सर सुर्खियां बन रहीं हैं, वहीं मोदीनगर से हरिद्वार पहुंचा एक दंपति प्रेम, समर्पण और आस्था की ऐसी मिसाल पेश की जिसने हर किसी का दिल छू लिया। अपने दिव्यांग पति सचिन को उसकी धर्मपत्नी आशा अपने कंधों पर बैठाकर करीब 180 किलोमीटर की कठिन यात्रा तय कर रही है। ताकि दोनों भगवान शिव का जलाभिषेक कर सकें। दोनों पति पत्नी पिछले साल भी कांवड़ यात्रा करने हरिद्वार आए थे और तब लोगों ने उनके अटूट प्रेम और विश्वास की खूब सराहना की थी।
हरिद्वार में अभी कांवड़ मेला शुरू नहीं हुआ है लेकिन कई कांवड़िए अभी से ही गंगाजल लेने हरिद्वार पहुंचने लगे हैं। आशा और सचिन की कहानी ऐसी है कि जिसे सुनकर हर कोई हैरान हो जाए। सचिन और आशा उत्तर प्रदेश के मोदीनगर स्थित ग्राम बखरावा के निवासी हैं। आशा ने अपने दिव्यांग पति सचिन को कांधों पर बिठाकर 180 किलोमीटर का लंबा सफर तय करके कांवड़ यात्रा कराने हरिद्वार पहुंची हैं। आशा ने हरिद्वार पहुंच कर पहले हरकी पैड़ी से गंगाजल लिया और फिर कनखल स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक कर सुख समृद्धि की कामना की। इसके बाद दोनों अपने गंतव्य की ओर रवाना हो गए। सचिन ने बताया कि वो भगवान शिव को बहुत मानते हैं और पहले
खुद हर साल हरिद्वार में कांवड़ यात्रा करने आते थे। करीब 12 साल पहले उनकी रीढ़ की हड्डी में चोट लग गई थी और वो दिव्यांग हो गए। सर्जरी के बाद भी वो ठीक नहीं हो सके और चलने फिरने में असमर्थ हो गए। पिछले साल उन्होंने कांवड़ यात्रा करने की इक्षा जाहिर की तो पत्नी आशा ने उनका हौसला नहीं तोड़ा। पति की इच्छा पूरी करने के लिए पत्नी आशा ने उन्हें अपने कंधों पर उठाया और साल 2025 में उन्हें पहली कांवड़ यात्रा कराई। इस बार भी आशा पति को कंधे पर बैठाकर पैदल कांवड़ यात्रा कराने हरिद्वार लाई हैं। उनके साथ उनके दो बच्चे भी हैं, जो माता-पिता के साथ कांवड़ यात्रा कर रहे हैं। दोनों ने पहले हरकी पैड़ी से गंगाजल लिया और कनखल स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक किया। उसके बाद दोनों मोदीनगर के लिए रवाना हो गए। आशा ने बताया कि अब तो मोदीनगर में भी भगवान शिव का जलाभिषेक कर अपनी कांवड़ यात्रा पूर्ण करेंगी।
आशा का मानना है कि आज कलयुग चल रहा है और कुछ महिलाएं अपने पति की हत्या तक कर दे रहीं है। टीवी और सोशल मीडिया पर इस तरह की खबरें से अन्य महिलाओं की भी बदनामी हो रही है। महिलाओं को ऐसा नहीं करना चाहिए बल्कि अपना पति धर्म निभाना चाहिए। उन्होंने बेहूदा रील बनाने वाली महिलाओं से अपील की है कि वो ऐसा न करें। अपने पति और घर परिवार का ध्यान रखें, इसी में ही भारतीय संस्कृति की पहचान है।
वहीं पति सचिन भी अपनी पत्नी के प्रेम, त्याग और समर्पण से बहुत खुश हैं। उनका कहना है कि पत्नी के होते हुए वो दिव्यांग होने के बावजूद भी वो दिव्यांग नहीं हैं। पत्नी काम भी करती है और घर परिवार का पूरा ख्याल रखती हैं। उन्हें उम्मीद है कि भगवान शिव के आशीर्वाद से वो एक दिन स्वस्थ हो जाएंगे।
गौरतलब है कि दंपत्ति की यह कांवड़ यात्रा सिर्फ मंजिल तक पहुंचने की नहीं, बल्कि जीवनसाथी के प्रति अटूट समर्पण, विश्वास और सच्चे प्रेम की कहानी भी है। हर कदम पर पत्नी अपने दिव्यांग पति का सहारा बनकर यह संदेश दे रही है कि सच्चे रिश्ते हालात नहीं, बल्कि हौसले और साथ निभाने के वादे से मजबूत होते हैं। कांवड़ यात्रा में इस दंपति को देखने के लिए राहगीर रुक रहे हैं, उनका हौसला बढ़ा रहे हैं और भगवान भोलेनाथ से उनकी यात्रा सफल होने की कामना कर रहे हैं।
