
हरिद्वार। गणेश चतुर्थी के मौके पर धर्मनगरी हरिद्वार में गणपति पंडालों की स्थापना की जा रही है। कनखल स्थित प्रसिद्ध दक्षेश्वर महादेव मंदिर परिसर में भी सोमवार को पूजा-अर्चना कर गणपति पंडाल शुरू किया गया। महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज की मौजूदगी में विधि-विधान से पूजा अर्चना की गई। इस दौरान मौके पर जमा हुए श्रद्धालुओं ने भी गणपति बप्पा मोरिया के जयकारे लगाए। अनंत चतुर्दशी तक यहां रोजाना भजन संध्या और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे। महंत रविंद्र पुरी ने विभिन्न स्थानों पर गणपति स्थापना को लेकर लोगों से गंगा को प्रदूषित ना करने और निर्धारित स्थानों पर ही गणपति विसर्जित करने की अपील की। इसके साथ ही गीता भवन में भी गणपति स्थापना की गई और कुंभ की थीम पर दरबार गया।
श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने बताया कि गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। कनखल तो भगवान शिव की ससुराल है। यहां दक्षेश्वर महादेव मंदिर के प्रांगण में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई है। दस दिनों तक यहां सुबह शाम भगवान गणेश की पूजा अर्चना, भजन संध्या और भंडारे का आयोजन होगा। हर वर्ष गणेश मंडल के सहयोग से महानिर्वाणी अखाड़ा, बड़ा अखाड़ा और नया अखाड़े के साधु-संत इस उत्सव को धूमधाम के साथ मनाते हैं। अनंत चतुर्दशी के दिन विधि विधान के साथ भगवान गणेश को मां गंगा में विसर्जित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बिना केमिकल की मूर्तियों की ही प्रतिमा बनानी चाहिए और
निर्धारित स्थान पर ही विसर्जन किया जाना चाहिए, ताकि गंगा की स्वच्छता और निर्मलता बनी रहे।
वहीं गणपति परिवार कनखल के सदस्य नकुल माहेश्वरी ने बताया कि पिछले 31 सालों से वो गणेश उत्सव मना रहे हैं। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी बाहर से आने वाले श्रद्धालु और स्थानीय लोग इस उत्सव में भाग लेते हैं और भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।










