
हरिद्वार। स्थायी लोक अदालत, हरिद्वार ने बैंकिंग संस्था की लापरवाही से वर्षों से परेशान एक महिला उपभोक्ता को बड़ी राहत देते हुए ₹05 लाख प्रतिकर एवं ₹20,000 वाद व्यय दिलाया है।
पीड़िता आशा राय ने वर्ष 2018 में डीएचएफएल से प्लॉट एवं भवन निर्माण हेतु ऋण लिया था। आरोप था कि स्वीकृत ऋण में से मात्र ₹7.50 लाख ही जारी किए गए, जबकि शेष राशि नहीं दी गई। बाद में ऋण का अधिग्रहण पिरामल कैपिटल द्वारा किए जाने के बावजूद पीड़िता से प्री-ईएमआई वसूली जाती रही।
पीड़िता की ओर से अधिवक्ता जिगर श्रीवास्तव ने स्थायी लोक अदालत में वाद दायर किया। सुनवाई के बाद न्यायालय ने ₹7.50 लाख के ऋण की ईएमआई/प्री-ईएमआई बंद करने, पूर्व में जमा राशि को ऋण में समायोजित करने तथा पीड़िता को ₹05 लाख प्रतिकर और ₹20,000 वाद व्यय देने का आदेश दिया।
न्यायालय ने निर्देश दिया कि एक माह के भीतर आदेश का पालन न होने पर ₹50,000 अतिरिक्त दंड तथा समस्त देय राशि पर 14% वार्षिक ब्याज देय होगा।
