
हरिद्वार। सशस्त्र पुलिस प्रशिक्षण केन्द्र हरिद्वार में कुंभ मेला प्रशिक्षण 2027 के 11वें चरण के अंतर्गत 600 पुलिस अधिकारियों एवं पुलिस कार्मिकों को इंडियन रेडक्रॉस उत्तराखण्ड के चेरमेन प्रोफेसर (डॉ.) नरेश चौधरी ने कुंभ मेले में श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्नान कराना, भीड़ नियंत्रण, साधु-संतों, अखाड़ों के अमृत स्नान (शाही स्नान) एवं पेशवाईयों की परम्पराओं पर तथा स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों, स्वंयसेवी सामाजिक संस्थाओं से पुलिस का परस्पर सामान्जस्य स्थापित करते हुए पुलिस कार्मिकों की विशेष भूमिका निर्वहन के लिये विशेष रूप से प्रशिक्षण दिया। डॉ. नरेश चौधरी ने 1986 कुंभ मेला, 1996 सोमवती स्नान, 1998 कुंभ मेला, 2004 अर्द्धकुंभ मेला, 2010 कुंभ मेला, 2011 शांतिकुंज द्वारा शताब्दी वर्ष में हुई भगदड़ वाली घटनाओं की कुंभ मेले डयूटी करने वाले सभी अधिकारियों एवं कार्मिकों को विस्तृत जमीनी जानकारियां अवश्य होनी चाहिये जिससे हम विशेष सतर्क रहते हुए इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होने देंगे। डॉ. नरेश चौधरी ने प्रशिक्षणार्थियों को विशेष रूप से 2004 अर्द्धकुंभ मेले की घटना को केन्द्रित करते हुए अवगत कराया कि वह उत्तराखण्ड बनने के बाद का सबसे बड़ा एवं प्रथम स्नान पर्व था जिसमें हमारी पुलिस में अधिकतर नये एवं अनुभवहीन कर्मी भी थे। जिससे हमारा स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों तथा सामाजिक स्वंयसेवी संस्थाओं से सामान्जस्य का अभाव था जिससे अफवाओं के कारण घटना हुई और हरिद्वार में पहली बार कर्फ्यू लगाना पड़ा उससे सबक लेकर कुंभ मेले में कार्य करने वाले विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने समय- समय पर स्थानीय नागरिकों से हमेशा सामान्जस्य बनाते हुए उनके द्वारा दिये सुझावों पर अमल किया जिससे सभी चुनौतीपूर्ण स्नान पर्वों को निर्विध्न एवं कुशल से सम्पन्न कराया। डॉ. नरेश चौधरी ने स्वंय द्वारा भी लगभग 04 दशकों से सभी कुंभ मेला, अर्द्धकुंभ मेला, सोमवती, कांवड़ एवं अन्य बड़े-बड़े स्नान पर्वों तथा अन्य चुनौती पूर्ण आयोजनों में किये गये सहयोग एवं दायित्वों के निर्वहन पर भी प्रशिक्षणार्थियों को रुबरू कराया। डॉ. नरेश चौधरी ने पुलिस के उच्च अधिकारियों एवं कुंभ मेला प्रशासन का विशेष धन्यवाद दिया कि इस प्रकार के प्रशिक्षणों से जो कुंभ मेले में कार्य करने वाले कार्मिकों को जमीनी हकीकत की विशेष रूप से जानकारियां मिलती हैं तथा उसका सीधा लाभ इतने बड़े मेले को सहजता से निर्विध्न रूप से सम्पन्न कराने में होता है और पूर्व में हुई घटनाओं की कमी भी होती है।













