
उत्तराखण्ड / देहरादून। देहरादून के अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त साहित्यकार जो हिंदी भाषा और साहित्य के लिए भारत के दो महामहिम राष्ट्रपतियों द्वारा सम्मानित हो चुके हैं और साहित्य के क्षेत्र में 155 अवार्ड और सम्मान प्राप्त कर चुके हैं उन्हें 19 जुलाई 2026 झाँसी में उत्तरप्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री रविन्द्र शुक्ल के कर कमलों से हिंदी साधक सम्मान प्राप्त हुआ। हिंदी साहित्य भारती हिंदी साहित्य और संस्कृति के प्रचार प्रसार से जुड़ी एक प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय संस्था है इसका 36 देशों में विस्तार है।
डॉ. नौटियाल को यह सम्मान उनके द्वारा हिंदी को विश्व में प्रथम स्थान पर स्थापित करने सम्बन्धी शोध एवं उनके द्वारा लिखे गए गुणवत्तापूर्ण साहित्य के लिए दिया गया है। इनके साहित्य की गुणवत्ता इसी से सिद्ध होती है कि इनकी पुस्तकें भारत के 70 से अधिक विश्वविद्यालयों में सहायक पुस्तक / सन्दर्भ पुस्तक के रूप में चल रही है। डॉ. नौटियाल विश्व के एकमात्र ऐसे साहित्यकार हैं जिनका बायो डाटा 6170 पृष्ठों का है जिसमें उनकी 6107 उपलब्धियां दर्ज हैं।
डॉ. नौटियाल ने एम् ए हिंदी विश्वविद्यालय में सर्वोच्च अंक प्राप्त करके किया है तथा पीएचडी, डीलिट्, एम्ए अंग्रेजी साहित्य, एमबीए (बैंकिंग एवं वित्त) एलएलबी सहित 84 डिग्री/डिप्लोमा/ प्रमाण पत्र, देश की प्रतिष्ठित संस्थाओं / विश्व विद्यालयों से प्राप्त किये हैं।
डॉ. नौटियाल एकमात्र ऐसे साहित्यकार हैं जिन्होंने साहित्य की लगभग सभी विधाओं पर साहित्य सृजन किया है, इतना ही नहीं इन्होंने विविध विषयों पर साहित्य सृजन किया है। इनका कुल साहित्यिक योगदान 2186 रचनाओं का है जो समतुल्यता के आधार पर 270 पुस्तक लेखन के समतुल्य है।
डॉ. नौटियाल एक विद्वान वक्ता भी हैं, शिक्षा के क्षेत्र में इन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों / संगोष्ठियों में 744 व्याख्यान दिए हैं। इनका व्यक्तित्व बहुआयामी है, ये एक मात्र ऐसे शोध निर्देशक हैं जिन्होंने हिंदी भाषा साहित्य के अलावा बैंकिंग, वित्त, वाणिज्य, अर्थशास्त्र, विपणन, प्रबंधन जैसे विषयों पर पीएचडी और एमफिल के विद्यार्थियों का मार्ग दर्शन किया है तथा 130 शोध पत्र प्रस्तुत किये हैं जिनमें अधिकांश प्रकाशित हैं।
डॉ. नौटियाल को सब्जियों और फलों पर शोध करने के लिए भारत की 12 हजार शोध परियोजनाओं में से चयनित सर्वोत्तम शोध हेतु Optum – टाइम्स ऑफ़ इंडिया, आइडियाज ऑफ़ इंडिया राष्ट्रीय स्तर का अवार्ड मिला है। इस शोध द्वारा डॉ नौटियाल ने “ऊंची खेती – ऊंची आय” नाम की संकल्पना दी है जिससे कम से कम भूमि में खेती करके किसानों की आय में 4 से 5 गुना वृद्धि होती है। उदाहरण के लिए भिंडी का पौधा 4 से 5 फुट ऊँचाई का होता है लेकिन डॉ. नौटियाल द्वारा विकसित पौधे की ऊंचाई 15 फुट की होती है जिस पर जड़ से लेकर ऊपर तक भिन्डियाँ लगती हैं. इससे किसानों की आय में कई गुना वृद्धि होती है, इन प्रजातियों के बीज डॉ. नौटियाल ने पन्त नगर विश्वविद्यालय को दिए हैं ताकि वे इसमें और अधिक विकास करके किसानों को वितरित कर सकें।
