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आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि पर टिप्पणी को लेकर साध्वी कंचन गिरि के खिलाफ कोर्ट पहुंचा मामला…

हरिद्वार। निरंजनी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद महाराज के बारे में साध्वी कंचन गिरि के द्वारा रोज नए-नए झूठे झूठे और गलत बयान देने के कारण हरिद्वार के अरुण भदोरिया एडवोकेट ने धारा 175 (3) बीएनएसएस के तहत न्यायालय शैलेंद्र कुमार यादव की न्यायालय में एक प्रार्थना पत्र कमल भदोरिया एडवोकेट के द्वारा दाखिल किया है। अपने प्रार्थना पत्र में अरुण भदोरिया एडवोकेट ने निरजनी पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद महाराज के बारे में न्यायालय में जानकारी दी है कि उनके द्वारा गरीब कन्याओं का विवाह करना, गरीब बच्चों को शिक्षा देना व दिलवाना, कई अनाथ बच्चों का भरण पोषण, शिक्षा आदि दिलवाना, सावन के महीने में अद्भुत पूजा व आसन पर बैठकर 12 से 16 घंटे भगवान शिव का अभिषेक और सन 2026 में सावन के महीने में 36 घंटे लगातार भगवान शिव की तपस्या, अभिषेक देश के लिए व आम जन के कल्याण आदि की बाबत, कार्य करने के कारण अपनी धार्मिक भावनाएं आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद महाराज के साथ जुड़ी होना बताया और देश-विदेश में श्रद्धालुओं के बीच एक सम्मानित संत होना बताया। जब भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है उस समय उस धार्मिक कार्यक्रम में चारों दिशाओं में कैमरे लगे होते हैं और कार्यक्रम का लाइव प्रसारण किया जाता है जिस कारण वहां पर होने वाली धार्मिक गतिविधियां सार्वजनिक रूप से श्रद्धालुओं एवं भक्तों के सामने होती है इसके बावजूद साध्वी कंचन गिरि जो गाजियाबाद के रहने वाली हैं उनके द्वारा एक सोशल मीडिया में वायरल वीडियो किया गया जिसमें उनके द्वारा भगवान शिवलिंग पर चार-पांच केंचुए का चलना होना देखा जाना और उन्होंने उन केंचुए को शिवलिंग पर चलते हुए कैलाशानंद गिरि के बारे में कहा कि आप पाखंड क्यों मचा रहे हैं, आप किसकी आंखों में धूल झोंक रहे हैं, निरंजनी अखाड़े के अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज को धृत राष्ट्र बताते हुए कि वह भी यह सब पाखंड देख रहे हैं, उनकी नजरों के सामने यह पाखंड हो रहा है यह पाप नहीं तो क्या पुण्य है, आप लोगों को भ्रमित कर रहे हैं उनके श्रद्धा पर आप पानी फेर रहे हैं और केंचुए को शिवलिंग पर छोड़कर आप उन्हें बेवकूफ बना रहे हैं। आप किसको बेवकूफ बना रहे हैं, आप स्वयं अपने आप को बेवकूफ बना रहे, आप कितना बड़ा पाखंड कर रहे हैं, आप कितने घंटे बैठकर तपस्या करते हैं, छोटी-छोटी चमत्कार को दिखाने के चक्कर में आप केंचुए छोड़ते हैं जो कि पुन्य नहीं तो पाप है जिसका माफी आपको कभी नहीं मिल सकता। निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रवींद्र पुरी के नाक के नीचे सब होना बताया गया और पाखंड पर रोक लगाने के लिए कहा गया और यह भी कहा कि पाखंड दिखाने के चक्कर में चमत्कार दिखाने के चक्कर में कहीं फस गए तो सोचिए क्या होगा, यह पाखंड है पाखंड बंद होना चाहिए और ऐसा पाखंड कर करके पब्लिक को दिखाना गलत है। पूछती हूं कैलाशानंद गिरि से आपसे कि यह क्या पाखंड आप मचा रहे हैं। यह बयान अरुण भदोरिया एडवोकेट ने अपने निवास स्थान पर 8 सितंबर 2026 में देखना बताया और उन्होंने यह बताया कि साध्वी कंचन गिरि ने आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद महाराज द्वारा लगातार एक ही आसान पर बैठकर पूजा अर्चना को भी पाखंड के रूप में प्रस्तुत किया और उनके बयान से सामान्य श्रद्धालुओं के मन में एक जिज्ञासा पैदा हो गई की आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद महाराज जानबूझकर धार्मिक आडंबर अथवा छल कर रहे हैं। साध्वी कंचन गिरि के द्वारा भगवान शिव की पूजा एवं अभिषेक वास्तविक धार्मिक साधना न होकर क्या यह पाखंड है, साध्वी कंचन गिरि के द्वारा दिए गए बयान किसी तथ्य पर सामान्य अथवा सद्भावना पूर्ण नहीं है बल्कि एक प्रतिष्ठित धार्मिक संत की धार्मिक साधना पूजा पद्धति और आस्था पर सार्वजनिक रूप से लांछन लगाने वाला बयान है और भगवान शिवलिंग पर चल रहे केंचुए का अनेक कमरों में लाइव प्रसारण हो रहा था। बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्वयं उसे धार्मिक अनुष्ठान को देख रहे थे शिवलिंग पर दिखाई देने वाले जीवों की उपस्थिति को परम पूज्य संत की धार्मिक साधना एवं पूजा अर्चना को पाखंड कहना एक आपत्तिजनक ठेस पहुंचाने वाला अपने प्रार्थना पत्र में बताया गया है और आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद महाराज की धार्मिक साधना को पाखंड कहना न केवल उनके व्यक्तिगत एवं धार्मिक सम्मान को प्रभावित करता है बल्कि प्रार्थी सहित देश-विदेश के श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था को जानबूझकर एवं दुर्भावना पूर्ण उद्देश्य से साध्वी कंचन गिरि ने अपमानित करते हुए आघात पहुंचाया है। इस संबंध में न्यायालय द्वारा थाना कनखल से 21 सितंबर 2026 में आख्या मांगी गई है अब न्यायालय में थाना कनखल अपनी आख्या इस संबंध में प्रस्तुत करेंगे उसके बाद न्यायालय आख्या के आधार पर अगली कार्रवाई की जाएगी।

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