
हरिद्वार। गुरुवार को एसएमजेएन पीजी कॉलेज में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत पौष्टिक एवं संतुलित आहार के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से स्लोगन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का विषय पौष्टिक आहार रखा गया, जिसमें विद्यार्थियों ने आकर्षक एवं संदेशपरक स्लोगनों के माध्यम से संतुलित आहार, सुपोषण, स्वास्थ्य एवं स्वस्थ जीवनशैली के महत्व को रेखांकित किया।
प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग करते हुए अपने स्लोगनों के माध्यम से पौष्टिक भोजन को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने, कुपोषण को दूर करने तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत स्लोगनों में पौष्टिक भोजन के साथ-साथ फल एवं हरी सब्जियों के सेवन, नियमित दिनचर्या तथा स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने पर विशेष बल दिया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आयुर्वेद रत्न डॉ. सत्यनारायण शर्मा ने छात्र-छात्राओं को संतुलित आहार एवं स्वस्थ जीवनशैली के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भोजन केवल शरीर को ऊर्जा प्रदान करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। उन्होंने विद्यार्थियों को फल, हरी सब्जियों एवं पौष्टिक खाद्य पदार्थों को अपने दैनिक आहार में शामिल करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए बहुत बड़े बदलाव की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि दैनिक जीवन की छोटी-छोटी आदतों में सकारात्मक परिवर्तन भी महत्वपूर्ण परिणाम दे सकते हैं। उन्होंने समय पर जागने, समय पर सोने तथा नियमित दिनचर्या अपनाने को स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डॉ. सुनील कुमार बत्रा ने अपने संदेश में कहा कि संतुलित आहार अपनाना जीवन को स्वस्थ बनाने की एक पहल है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन के लिए भोजन की गुणवत्ता एवं संतुलन पर ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बदलती जीवनशैली के कारण खान-पान की आदतों में भी परिवर्तन आया है, इसलिए विद्यार्थियों को पौष्टिक एवं संतुलित भोजन के प्रति जागरूक होना चाहिए। उन्होंने छात्र-छात्राओं का आह्वान किया कि वे स्वयं स्वस्थ आहार अपनाने के साथ-साथ अपने परिवार और समाज में भी पौष्टिक भोजन के प्रति जागरूकता फैलाएं।
इस अवसर पर अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. संजय कुमार माहेश्वरी ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए संदेश दिया—“कुपोषण जड़ से मिटाना है, सुपोषण की लहर चलाना है।” उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए कुपोषण की समस्या के प्रति जागरूकता आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने दैनिक भोजन में आवश्यक पोषक तत्वों को शामिल कर जीवन को स्वस्थ बनाये।
कार्यक्रम अधिकारी पदमावती तनेजा ने कहा कि “जैसा अन्न, वैसा मन। उन्होंने कहा कि हमारे खान-पान का प्रभाव केवल हमारे शारीरिक स्वास्थ्य पर ही नहीं, बल्कि मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। उन्होंने विद्यार्थियों को पौष्टिक भोजन को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाने तथा अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों के अत्यधिक सेवन से बचने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की सह-संयोजक पुनीता शर्मा रहीं। उन्होंने प्रतियोगिता के सफल आयोजन में विद्यार्थियों एवं निर्णायक मंडल के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। प्रतियोगिता में प्रस्तुत स्लोगनों का मूल्यांकन पल्लवी, मीनाक्षी एवं रेनू सिंह द्वारा निर्णायक मंडल के रूप में किया गया। निर्णायकों ने स्लोगनों की विषयवस्तु, संदेश की स्पष्टता, रचनात्मकता तथा प्रभावशीलता के आधार पर प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया।
प्रतियोगिता के परिणामों में अलीशा ने प्रथम स्थान, साधना एवं दिव्या नौटियाल ने संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान तथा मयूरी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेता छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए उपस्थित अतिथियों एवं महाविद्यालय परिवार ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम के अंत में राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष विनय थपलियाल ने सभी अतिथियों, प्राध्यापकों, निर्णायक मंडल एवं प्रतिभागी छात्र-छात्राओं का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने स्वस्थ जीवन के लिए औषधीय एवं प्राकृतिक संसाधनों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रकृति से प्राप्त खाद्य एवं औषधीय तत्वों का उचित ज्ञान एवं उपयोग स्वस्थ जीवन के लिए बहुत उपयोगी है।
इस अवसर पर गौरव अग्रवाल, रिचा मिनोचा, रिंकल गोयल, गीता शाह, अंकित बंसल, अनुरीषा, मोना शर्मा, लता शर्मा एवं सरोज शर्मा सहित महाविद्यालय के प्राध्यापकगण एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों में पौष्टिक आहार, सुपोषण एवं स्वस्थ जीवनशैली के प्रति स्थायी जागरूकता विकसित करना रहा। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत रचनात्मक स्लोगनों ने स्वस्थ खान-पान एवं संतुलित जीवनशैली का संदेश प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।













