
हरिद्वार। कुम्भ नगरी हरिद्वार में अगले साल 2027 में होने वाले कुंभ से पहले अखाड़ों और संत समाज को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने चर्चाओं को तेज कर दिया है। वीडियो में कथित तौर पर महामंडलेश्वर बनाए जाने के नाम पर लेन-देन की बात सामने आने का दावा किया जा रहा है। इसको लेकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रवींद्र पुरी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
श्रीमहंत डॉ. रवींद्र पुरी ने कहा कि वायरल वीडियो के आधार पर पूरे संत समाज और अखाड़ों की छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने इसे कुंभ से पहले संतों को बदनाम करने की साजिश बताते हुए कहा कि सनातन धर्म और अखाड़ों की अपनी परंपरा, मर्यादा और धार्मिक व्यवस्था है।
उन्होंने कहा कि किसी संत को महामंडलेश्वर की उपाधि दिया जाना अखाड़ों की धार्मिक परंपरा और निर्धारित प्रक्रिया का विषय है। इसे केवल पैसों के लेन-देन से जोड़कर देखना संत समाज और सनातन परंपरा को बदनाम करने का प्रयास है।
डॉ. रवींद्र पुरी ने कहा कि वर्ष 2027 में कुंभ का आयोजन होना है। ऐसे समय में सोशल मीडिया पर इस तरह के वीडियो वायरल होने से श्रद्धालुओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ सनातन विरोधी ताकतें कुंभ की तैयारियों और संत समाज की प्रतिष्ठा को प्रभावित करने के उद्देश्य से इस तरह का दुष्प्रचार कर सकती हैं।
अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने कहा कि वायरल वीडियो की निष्पक्ष और गहन जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वीडियो वास्तविक है या उसे काट-छांटकर अथवा किसी अन्य तरीके से तैयार कर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया है। उन्होंने प्रशासन और पुलिस से भी मामले की जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली हर सामग्री को सच न मानें और बिना पुष्टि के किसी वीडियो या पोस्ट को आगे प्रसारित न करें। उन्होंने कहा कि संत समाज और सनातन धर्म की छवि को प्रभावित करने वाले दुष्प्रचार से सभी को सावधान रहने की आवश्यकता है।










