
हरिद्वार। कांवड़ मेला-2026 के दौरान स्वच्छ, हरित एवं प्लास्टिक मुक्त हरिद्वार के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से नगर निगम हरिद्वार द्वारा एक अभिनव “प्लास्टिक एक्सचेंज अभियान” संचालित किया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत नगर आयुक्त नंदन कुमार के निर्देशों के क्रम में कांवड़ मार्गों एवं प्रमुख घाटों पर ऐसे श्रद्धालुओं एवं कांवड़ यात्रियों से प्रतिबंधित सिंगल यूज़ प्लास्टिक पॉलीथीन एकत्र की जा रही है, जिनके पास यह पाई जा रही है। इसके बदले उन्हें निःशुल्क कम्पोस्टेबल बैग उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि वे पर्यावरण के अनुकूल विकल्प का उपयोग कर सकें।
अभियान का उद्देश्य केवल पॉलीथीन बदलना नहीं, बल्कि लोगों के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। नगर निगम की टीमें श्रद्धालुओं को सिंगल यूज़ प्लास्टिक से होने वाले पर्यावरणीय दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से जागरूक कर रही हैं। उन्हें बताया जा रहा है कि प्लास्टिक प्राकृतिक रूप से सैकड़ों वर्षों तक विघटित नहीं होती, जिससे मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है, नालियां एवं जल निकासी तंत्र अवरुद्ध हो जाते हैं, गंगा सहित अन्य जल स्रोत प्रदूषित होते हैं तथा पशु-पक्षियों एवं जलीय जीवों के जीवन पर गंभीर संकट उत्पन्न होता है। प्लास्टिक के सूक्ष्म कण (माइक्रोप्लास्टिक्स) भोजन एवं पेयजल के माध्यम से मानव शरीर तक पहुंचकर स्वास्थ्य पर भी दीर्घकालिक प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान नियमों के अंतर्गत व्यक्तिगत उपयोग में भी प्रतिबंधित सिंगल यूज़ प्लास्टिक पाए जाने पर ₹100 तक की चालानी कार्रवाई का प्रावधान है। किन्तु नगर निगम हरिद्वार ने कांवड़ मेला-2026 के दौरान दंडात्मक कार्रवाई के स्थान पर जनजागरूकता और व्यवहार परिवर्तन को प्राथमिकता देते हुए यह अभिनव पहल शुरू की है। नगर निगम का मानना है कि यदि लोगों को पर्यावरण-अनुकूल विकल्प उपलब्ध कराया जाए और उसके पीछे का वैज्ञानिक एवं पर्यावरणीय कारण समझाया जाए, तो वे स्वेच्छा से सिंगल यूज़ प्लास्टिक का उपयोग छोड़ने के लिए प्रेरित होंगे। इसी सोच के साथ श्रद्धालुओं से पॉलीथीन लेकर उन्हें कम्पोस्टेबल बैग उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
हाल ही में प्रकाशित समाचारों में भी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सिंगल यूज़ प्लास्टिक के विरुद्ध जनआंदोलन खड़ा करने, जूट एवं कपड़े के थैलों के उपयोग को बढ़ावा देने तथा पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अपनाने का आह्वान किया है। नगर निगम हरिद्वार की यह पहल मुख्यमंत्री के इसी विजन को धरातल पर उतारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। जनभागीदारी के माध्यम से प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने का यह मॉडल पर्यावरण संरक्षण के लिए एक प्रभावी उदाहरण बनकर उभर रहा है।
इस अभियान के दौरान उप नगर आयुक्त दीपक गोस्वामी, मुख्य सफाई निरीक्षक संजय शर्मा, सफाई निरीक्षक अनिल कुमार, डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स की प्रतिनिधि अलका सिंह तथा नगर निगम की स्वच्छता टीम सक्रिय रूप से उपस्थित रही। टीम द्वारा कांवड़ मार्गों एवं विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं से संवाद स्थापित कर उन्हें पर्यावरण संरक्षण की शपथ भी दिलाई गई तथा कम्पोस्टेबल बैग के उपयोग के लिए प्रेरित किया गया।
अभियान को श्रद्धालुओं एवं कांवड़ यात्रियों का भरपूर सहयोग प्राप्त हो रहा है। अनेक श्रद्धालुओं ने नगर निगम की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि केवल चालान करने के बजाय पर्यावरण-अनुकूल विकल्प उपलब्ध कराना एक सकारात्मक, मानवीय एवं प्रेरणादायक पहल है। इससे लोगों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी तथा भविष्य में सिंगल यूज़ प्लास्टिक के उपयोग में उल्लेखनीय कमी आएगी।
नगर निगम हरिद्वार का उद्देश्य केवल प्रतिबंध लागू करना नहीं, बल्कि जनसहभागिता के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देना है। “प्लास्टिक एक्सचेंज अभियान” इसी सोच का परिणाम है, जिसमें दंड के स्थान पर संवाद, विकल्प और जागरूकता को प्राथमिकता दी गई है। नगर निगम को विश्वास है कि कांवड़ मेला-2026 के दौरान शुरू की गई यह पहल न केवल हरिद्वार को स्वच्छ एवं प्लास्टिक मुक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, बल्कि देशभर के लिए एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में भी स्थापित होगी।










