बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के विरुद्ध भदोरिया एडवोकेट एसोसिएट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में की याचिका दायर

Haridwar। बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे हैं घोर अत्याचारों की रोकथाम को लेकर भदोरिया एडवोकेट एसोसिएट हरिद्वार द्वारा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग दिल्ली में याचिका दायर की गई है जिसमें सचिव गृह मंत्रालय और सचिव विदेश मंत्रालय को विपक्षी पक्षकार बनाते हुए कई मांगे की गई है।

पड़ोसी देश बांग्लादेश में लगातार हो रही घटनाओं को देखते हुए केवल हिंदुओं पर लगातार हत्या, बलात्कार, जिंदा जलाना रोज, टीवी समाचारों में देखे जाने पर हरिद्वार के अरुण भदोरिया एडवोकेट ,कमल भदोरिया एडवोकेट ,श्रीमती सुमेधा भदोरिया एडवोकेट पत्नी श्री अनिरुद्धप्रताप सिंह, चेतन भदोरिया LLB अध्यनरत ने हिंदुस्तान की सबसे सर्वोच्च संस्था राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली में एक याचिका दाखिल की है की बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय पर हो रहे संगठित अत्याचार ,धार्मिक उत्पीड़न एवं मानवाधिकार उल्लंघन के संबंध में सचिव ,गृह मंत्रालय और सचिव, विदेश मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली को विपक्षी पक्षकार बनाते हुए संज्ञान लेने हेतु याचिका दाखिल की है जिसमें याचिका करता द्वारा बताया गया कि यह मामला केवल विदेशी घटना नहीं मानवता का प्रश्न है बांग्लादेश में हिंदू समुदाय एक अल्पसंख्यक समुदाय है पिछले कुछ वर्षों विशेष रूप से हाल के समय में विभिन्न विश्वसनीय स्रोतों, अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट, मानवाधिकार संगठनों, सोशल ग्राउंड रिपोर्ट के माध्यम से स्पष्ट सामने आया है कि हिंदू समुदाय को धार्मिक पहचान के कारण निशाना बनाया जा रहा है मंदिरों का विध्वंस किया जा रहा है ,मूर्तियों की तोड़फोड़ की जा रही है ,हत्याएं ,बलात्कार ,अपहरण ,मारपीट रोज हो रही है जबरन धर्मानांतरण किया जा रहा है हिंदू महिलाओं पर अत्याचार हो रहा है डर एवं सुरक्षा के कारण बड़े पैमाने पर पलायन हो रहा है यह सभी घटनाएं न केवल अमानवीय है बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का खुला उल्लंघन भी है अल्पसंख्यकों के अधिकार यह सभी अधिकार अंतर्राष्ट्रीय घोषणाओं एवं संधियों के द्वारा संरक्षित है भारत संयुक्त राष्ट्र का सदस्य राष्ट्र है और भारत के नैतिक व अंतराष्ट्रीय जिम्मेदारी है ।भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र होने के साथ-साथ मानव अधिकारों की रक्षा का वैश्विक समर्थक है। बांग्लादेश में हिंदू समुदाय ऐतिहासिक सांस्कृतिक एवं धार्मिक रूप से भारत से जुड़ा हुआ है ।इस प्रकार यह केवल एक विदेशी मामला नहीं बल्कि मानवता अल्पसंख्यक संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय नैतिकता का प्रश्न है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भारत सरकार का संवैधानिक निकाय है जो ऐसे मामलों में संज्ञान लेकर आवश्यक संस्कृति और कार्रवाई कर सकता है घटनाएं विदेशी क्षेत्राधिकार से संबंधित है लेकिन इसके बावजूद भी भारत सरकार भी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं एवं कूटनीतिक दायित्वों के संदर्भ में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग आवश्यक अनुशंसा करने का अधिकार रखता है ।याचिका कर्ताओं द्वारा आयोग से प्रार्थना और मांग की गई है कि विपक्षी गण से इस संबंध में तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की जाए, भारत सरकार एवं विदेश मंत्रालय को इस विषय पर आवश्यक संस्कृतियों दे ,इस मामले को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद एवं अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने हेतु अनुशंसा करें ,बांग्लादेश सरकार पर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु राजनीतिक दबाव बनाने का सुझाव दें, पीड़ित समुदाय को अंतरराष्ट्रीय संरक्षण एवं न्याय दिलाने की दिशा में आवश्यक कदम उठाएं, यह मामला किसी एक व्यक्ति या समूह का नहीं बल्कि एक पूरे समुदाय के अस्तित्व सम्मान और सुरक्षा का प्रश्न है यदि समय रहते इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो स्थिति और भयावह हो सकती है इन सब हालात को देखते हुए भदोरिया एडवोकेट एसोसिएट हरिद्वार के द्वारा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली में याचिका दायर की गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!