हरिद्वार। कनखल थाना क्षेत्र के जगजीतपुर निवासी अंकित वालिया पुत्र अनिल वालिया पर दर्ज कराया गया, धोखाधड़ी का मुकदमा पुलिस की जांच में झूठा पाया गया है। इस मामले में धोखाधड़ी से जुड़े कोई साक्ष्य ही पुलिस को जांच में नहीं मिले हैं, जिसके बाद पुलिस ने इस मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लगा दी है। वहीं इस प्रकरण में अधिवक्ता ने अपने मुवक्किल के खिलाफ दर्ज झूठे मुकदमों को लेकर प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए अपने मुवक्किल को झूठे मुकदमे में फंसाने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। अधिवक्ता की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक कनखल निवासी विजय कुमार गर्ग पुत्र प्रदीप कुमार गर्ग ने अंकित वालिया के खिलाफ वर्ष 2023 में कनखल थाने में फर्जी मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे की पुलिस ने निष्पक्ष जांच की थी। जांच में आरोप निराधार पाए जाने पर पुलिस ने विजय गर्ग के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 182 के तहत कार्रवाई भी की थी। इस संबंध में उस समय समाचार पत्रों और समाचार पोर्टलों में भी खबरें प्रकाशित हुई थीं। इसी कार्रवाई से बौखलाकर विजय गर्ग ने दोबारा अंकित वालिया उनके पिता, ससुर और साले पर एक और मुकदमा दर्ज कराया था। वर्ष 2025 में पुलिस विवेचना के बाद उस मामले में एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लगा दी गई। एफआर रिपोर्ट दिखाते हुए बताया कि विवेचना के दौरान विजय गर्ग कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि मुकदमा केवल व्यक्तिगत द्वेषवश कराया गया था।
