
दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट (डीम्ड यूनिवर्सिटी) ने शनिवार, 04 को अपना 44वां दीक्षांत समारोह बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया। समारोह दोपहर 2:30 बजे इंस्टीट्यूट के दीक्षांत हॉल में शुरू हुआ, जिसमें गवर्निंग बॉडी, एकेडमिक काउंसिल, फैकल्टी, स्टाफ और छात्रों के सदस्यों ने बड़े जोश और उत्साह के साथ भाग लिया। दीक्षांत समारोह में, 88 डायरेक्टर मेडल, 02 प्रेसिडेंट मेडल, 109 Ph.D., 1560 अंडरग्रेजुएट डिग्री, 616 पोस्टग्रेजुएट डिग्री, 70 पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा, 543 इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक डिप्लोमा, 63 एलिमेंट्री एजुकेशन डिप्लोमा, 232 हाई स्कूल और 280 इंटरमीडिएट डिग्री, और 519 सर्टिफिकेट कोर्स की डिग्री योग्य और सफल छात्रों को वितरित की गईं। DEI विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार श्री खुशी राम, मैनेजिंग डायरेक्टर, डेस्टर कंसल्टिंग, सिंगापुर को प्रदान किया गया, और SSI लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार माननीय प्रो. एस. महेंद्र देव, अध्यक्ष, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM), भारत सरकार को प्रदान किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट और राधास्वामी सत्संग सभा के अध्यक्ष श्री गुर सरूप सूद, I.D.A.S. (सेवानिवृत्त) ने की। इंस्टीट्यूट ने प्रो. एस. महेंद्र देव, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM), भारत सरकार के अध्यक्ष का दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में स्वागत किया, जिन्होंने समारोह के दौरान अपना दीक्षांत भाषण दिया।
प्रो. एस. महेंद्र देव एक प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री हैं, और विकास अर्थशास्त्र तथा ग्रामीण अध्ययन के क्षेत्र में एक अनुभवी विशेषज्ञ हैं। अपनी वर्तमान नियुक्ति से पहले, प्रो. देव ने एक दशक से अधिक समय तक इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट रिसर्च (IGIDR), मुंबई के डायरेक्टर और वाइस चांसलर के रूप में कार्य किया। प्रो. एस. महेंद्र देव ने एक प्रेरणादायक दीक्षांत भाषण दिया, जिसमें उन्होंने समकालीन वैश्विक परिदृश्य की चुनौतियों और अवसरों पर प्रकाश डाला, और छात्रों से समाज में सार्थक योगदान देने का आग्रह किया। अपने संबोधन में, उन्होंने कहा कि वर्तमान युग की पहचान तीव्र तकनीकी प्रगति के साथ-साथ बढ़ती असमानताओं से होती है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह युवा मस्तिष्कों के लिए नवाचार और उद्देश्यपूर्ण कार्यों के माध्यम से दुनिया की पुनर्कल्पना करने, उसे नया आकार देने और उसका नवीनीकरण करने का एक अत्यंत अवसरपूर्ण समय भी है। प्रो. देव ने दोहरे बाधाएँ-‘भू-राजनीतिक संघर्षों (Geo-political Wars) और व्यापारिक शुल्कों (Tariffs)’ से उत्पन्न व्यवधानों—के कारण बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं की ओर ध्यान आकर्षित किया। इस संदर्भ में, उन्होंने ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना पर चर्चा की और इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को साकार करने की भारत की क्षमता में विश्वास व्यक्त किया। प्रो. देव ने प्रमुख क्षेत्रों, जिनमें विनिर्माण और कृषि शामिल हैं, में ढांचागत बदलाव की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया। साथ ही, समावेशी विकास के ज़रूरी कारकों के तौर पर गुणवत्ता, मूल्यों पर आधारित शिक्षा और मज़बूत स्वास्थ्य प्रणालियों पर भी विशेष बल दिया गया। पर्यावरण संबंधी चिंताओं को उजागर करते हुए, मुख्य अतिथि ने सतत विकास (Sustainable Development) , जलवायु अनुकूलन क्षमता और हरित औद्योगीकरण (Green Industrialisation) के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि सततता (Sustainability) हासिल करने के लिए पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर जीवनशैली के प्रति अधिक समग्र दृष्टिकोण अपनाना ज़रूरी है। अपने संबोधन में, प्रो. देव ने दयालबाग और DEI को इस दृष्टिकोण के एक बेहतरीन उदाहरण के तौर पर पेश किया; जहाँ आध्यात्मिक और सहज चेतना का, कर्तव्यनिष्ठ कार्यों के साथ मेल कराने से ‘LIFE’ (समग्र सतत विकास के लिए जीवनशैली) सिद्धांतों के दायरे को विस्तार देने में मदद मिली है। उन्होंने संस्थान का सामुदायिक जुड़ाव, जैव विविधता के संरक्षण और सतत कार्यों पर दिया जाने वाला विशेष ध्यान, समग्र और समावेशी विकास के एक आदर्श मॉडल के रूप में सराहा । स्नातक हो रहे विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए, मुख्य अतिथि ने उन्हें न केवल अपनी व्यक्तिगत उपलब्धियों पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया, बल्कि इस बात पर भी सोचने के लिए प्रेरित किया कि वे समाज पर कितना व्यापक प्रभाव डाल सकते हैं। विद्यार्थियों से आग्रह किया गया कि वे स्वयं से यह प्रश्न पूछें, “मैं क्या बदलाव ला सकता हूँ?” और अपने विचारों, ऊर्जा तथा आकांक्षाओं को एक बेहतर और अधिक समतापूर्ण विश्व के निर्माण की दिशा में समर्पित करें। भाषण का समापन, सभी स्नातकों के लिए एक सफल और सार्थक भविष्य की शुभकामनाओं के साथ हुआ।
संस्थान की प्रोग्रेस रिपोर्ट पेश करते हुए, संस्थान के निदेशक प्रो. सी. पटवर्धन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि DEI विविधता, समानता और समावेशिता के मूल मूल्यों का प्रतीक है, जो एक समग्र और समावेशी शैक्षिक वातावरण को बढ़ावा देता है। उन्होंने कहा कि यह संस्थान एक अद्वितीय रूप से तालमेल भरा और एकीकृत प्रणाली का मूर्त रूप है, जो शिक्षा के कई आयामों को एक साथ लाता है—जिसमें अकादमिक उत्कृष्टता, मूल्य-आधारित शिक्षा और कौशल विकास शामिल हैं। संस्थान के भविष्य-उन्मुखी दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने बताया कि विभिन्न विभागों में एक सतत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पहल शुरू की गई है। इस पहल का उद्देश्य शिक्षकों और छात्रों, दोनों को उन दक्षताओं से लैस करना है जो तेज़ी से AI-संचालित हो रही दुनिया में सफल होने के लिए आवश्यक हैं। प्रो. पटवर्धन ने बताया कि कृषि क्षेत्र में कई नए पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं, साथ ही छात्रों की बढ़ती संख्या को समायोजित करने के लिए प्रयोगशाला के बुनियादी ढांचे का भी विस्तार किया गया है। वर्चुअल प्रयोगशालाओं को जोड़ने से अनुभवात्मक और प्रौद्योगिकी-सक्षम शिक्षा को और अधिक मजबूती मिली है। सततता (Sustainability) के प्रति DEI की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, उन्होंने कहा कि संस्थान 14 वितरित सौर ऊर्जा संयंत्रों का संचालन और रखरखाव करता है, जिनकी कुल स्थापित क्षमता 1 MWp है; यह हरित ऊर्जा पहलों और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में संस्थान के नेतृत्व को प्रदर्शित करता है। कुलपति ने गर्व के साथ घोषणा की कि DEI को हाल ही में ISO 21001:2018 प्रमाणन से सम्मानित किया गया है। यह प्रमाणन शैक्षिक प्रबंधन प्रणालियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत मानकों का पालन करने के लिए संस्थान को मान्यता देता है और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। प्रो. पटवर्धन ने DEI के छात्रों और शिक्षकों की उल्लेखनीय उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला, जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक पुरस्कार और सम्मान अर्जित किए हैं, जिससे संस्थान को पहचान और गौरव प्राप्त हुआ है।
दीक्षांत समारोह कार्यक्रम को DEI शिक्षा पर सलाहकार समिति (Advisory Committee on Education) के अध्यक्ष परम पूजनीय प्रो. पी.एस. सत्संगी साहब और आदरणीय रानी साहिबा की गरिमामयी उपस्थिति से विशेष आशीर्वाद प्राप्त हुआ। दीक्षांत समारोह के शैक्षणिक जुलूस (Academic Procession) का नेतृत्व संस्थान के रजिस्ट्रार प्रो. संजीव स्वामी ने किया। इस अवसर पर प्रबंधन बोर्ड, आगरा प्रशासन और स्थानीय समुदाय के गणमान्य व्यक्ति, आमंत्रित अतिथि और मीडियाकर्मी भी उपस्थित थे। दीक्षांत समारोह परिसर में DEI की विभिन्न परियोजनाओं और उपलब्धियों को प्रदर्शित करने वाली एक भव्य प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर, शाम के समय दीक्षांत हॉल में एक शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसकी मुख्य अतिथि और अन्य अतिथियों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की और प्रोत्साहित किया। समस्त कार्यक्रम का प्रसारण भारत और विदेशों में स्थित DEI के सभी दूरस्थ और मुक्त शिक्षा केंद्रों तक किया गया।
