
उत्तराखण्ड। प्रमुख वन संरक्षक, वन पंचायत डॉ. एस.पी. सुबुद्धि की अध्यक्षता में प्रभागीय वनाधिकारी, लैंसडाउन वन प्रभाग द्वारा हंस फाउंडेशन के सहयोग से वन पंचायत सशक्तिकरण एवं आपदा प्रबंधन विषयक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में पौड़ी जनपद के यमकेश्वर, द्वारीखाल एवं जहरीखाल विकासखंडों के वन पंचायत सरपंचों एवं सदस्यों सहित लगभग 150 प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया
कार्यशाला में SDRF के प्रतिनिधियों द्वारा CPR, Heimlich Maneuver, टॉर्निकेट तकनीक, प्राथमिक उपचार तथा बांस की सहायता से आपातकालीन स्ट्रेचर निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रमुख वन संरक्षक, वन पंचायत डॉ. सुबुद्धि ने हंस फाउंडेशन के सहयोग की सराहना की तथा वन विभाग के समस्त फील्ड अधिकारियों एवं कार्मिकों, विशेषकर फॉरेस्ट वाचरों एवं दैनिक वेतनभोगी कार्मिकों को प्राथमिक उपचार एवं आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण प्रदान किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राज्य के दुर्गम एवं दूरस्थ क्षेत्रों में वन विभाग एवं वन पंचायतों की उपस्थिति को देखते हुए प्रशिक्षित मानव संसाधन आपदा की स्थिति में प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता (First Responder) के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस दिशा में वन विभाग के फील्ड अधिकारियों एवं कार्मिकों की क्षमता का विकास राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को सुदृढ़ करने में सहायक होगा।
उन्होंने वन पंचायतों को आदर्श वन पंचायत के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कार्बन-नकारात्मक, जल-सकारात्मक, लैंगिक उत्तरदायी एवं जैव विविधता-संवेदनशील विकास को संभावित मूल्यांकन मानदंडों के रूप में विकसित करने की परिकल्पना प्रस्तुत की। इससे उत्कृष्ट वन पंचायतों को प्रोत्साहित करने तथा उनके सफल मॉडलों का अन्य क्षेत्रों में अनुकरण सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।
प्रमुख वन संरक्षक, वन पंचायत डॉ. एस.पी. सुबुद्धि ने वन पंचायतों की क्षमता विकास को उनके स्वर्णिम भविष्य की कुंजी बताते हुए संस्थागत सशक्तीकरण पर बल दिया।
यह कार्यशाला वन पंचायतों की संस्थागत क्षमता के संवर्धन, सामुदायिक सहभागिता तथा वन संरक्षण, आपदा प्रबंधन एवं सतत विकास के समन्वित प्रयासों को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
कार्यशाला के दौरान हंस फाउंडेशन द्वारा वनाग्नि रोकथाम में योगदान देने वाले स्वयंसेवकों को उनके सराहनीय कार्यों के लिए सम्मानित किया गया।













